Pune Election
Pune Election Bribery: पुणे के लोहागांव-धनोरी वार्ड में चुनावी लालच ने सारी हदें पार कर दी हैं। यहाँ के एक उम्मीदवार ने मतदाताओं से वादा किया है कि यदि वे चुनाव जीतते हैं, तो 11 भाग्यशाली मतदाताओं को 1100 स्क्वायर फीट जमीन मुफ्त दी जाएगी। हैरानी की बात यह है कि उम्मीदवार ने दावा किया है कि इस जमीन का रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो चुका है। यह तय करने के लिए कि जमीन किसे मिलेगी, ‘लकी ड्रॉ’ का सहारा लिया जाएगा। यह पहली बार है जब किसी स्थानीय चुनाव में जमीन जैसे कीमती संसाधन को चुनावी लॉटरी का हिस्सा बनाया गया है।
केवल जमीन ही नहीं, पुणे के बिमननगर इलाके में एक उम्मीदवार ने मतदाताओं को ‘थाईलैंड टूर’ का सपना दिखाया है। उन्होंने वादा किया है कि चुनाव जीतने पर मतदाताओं के एक समूह को पांच दिनों के लिए थाईलैंड की सैर कराई जाएगी। इसके अलावा, कई वार्डों में टू-व्हीलर और एसयूवी (SUV) कारों के वाउचर बांटने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, उम्मीदवारों ने चालाकी बरतते हुए यह साफ कर दिया है कि ये इनाम सभी को नहीं, बल्कि लॉटरी के जरिए चुने गए ‘लकी’ वोटरों को ही मिलेंगे। यह सीधे तौर पर मतदाताओं के विवेक को भौतिक सुखों से खरीदने की कोशिश है।
महिला मतदाताओं के वोट पक्का करने के लिए भी उम्मीदवारों ने विशेष ‘इन्वेस्टमेंट’ किया है। पुणे के विभिन्न इलाकों में महिला वोटरों का दिल जीतने के लिए भारी मात्रा में रंग-बिरंगी साड़ियां वितरित की जा रही हैं। इतना ही नहीं, घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सिलाई मशीनें और रसोई का सामान भी गिफ्ट के तौर पर दिया जा रहा है। उम्मीदवारों का मानना है कि घर की महिलाओं को खुश रखकर वे पूरे परिवार के वोट हासिल कर सकते हैं। यह ‘दिखावा’ अब पुणे की चुनावी संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है।
युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए उम्मीदवारों ने खेलों का सहारा लिया है। कई जगहों पर बड़े स्तर पर क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किए जा रहे हैं। इन प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को रिझाने के लिए भारी-भरकम इनामी राशि रखी गई है। कुछ जगहों पर जीतने वाली टीम को 1 लाख रुपये (टका) तक का इनाम दिया जा रहा है। राजनीति के इस अपराधीकरण और बाहुबल ने युवाओं के बीच भी एक गलत संदेश भेजा है, जहाँ जनसेवा के बजाय पैसे की चमक को प्राथमिकता दी जा रही है।
नेताओं का यह ‘चैरिटी स्कैम’ भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए एक खतरे की घंटी है। जब वादों की जगह कीमती उपहार और लॉटरी ले लेती है, तो असल मुद्दे जैसे बिजली, पानी और सड़क कहीं पीछे छूट जाते हैं। चुनाव आयोग की सख्ती के बावजूद, उम्मीदवार डोनेशन और चैरिटी के नाम पर इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पुणे का यह प्री-पोल परिदृश्य यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या मतदाता इन कीमती तोहफों के बदले अपने पांच साल का भविष्य बेचने को तैयार हैं?
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