Pune accident: महाराष्ट्र के पुणे जिले में सोमवार के दिन बड़ा सड़क हादसा हुआ है। श्रद्धालुओं से भरी एक पिकअप जीप खाई में गिर गई, जिसमें 6 महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 22 से ज्यादा महिलाएं और बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा खेड़ तालुका के नागमोड़ी घाट क्षेत्र में हुआ, जहां श्रद्धालु कुंडेश्वर मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे।

कैसे हुआ हादसा?
चश्मदीदों के मुताबिक, यह हादसा सोमवार दोपहर करीब 1 बजे हुआ। पिकअप वाहन सावन के अवसर पर कुंडेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए घाटी मार्ग से गुजर रहा था। नागमोड़ी घाट पर एक तीव्र मोड़ पर चालक ने नियंत्रण खो दिया और पिकअप करीब 25-30 फीट गहरी खाई में जा गिरी। बताया जा रहा है कि वाहन में 30 से अधिक महिलाएं और बच्चे सवार थे, जबकि वाहन की क्षमता इससे काफी कम थी।

क्षमता से अधिक सवारी बनी हादसे की वजह
पुलिस और प्रशासन के अनुसार, यह दुर्घटना क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को बैठाने और घाटी क्षेत्र की खराब सड़कों के कारण हुई। पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस के डीसीपी शिवाजी पवार ने जानकारी दी कि घायलों को चंदौली के ग्रामीण अस्पताल और आसपास के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की स्थिति बेहद नाज़ुक है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
पीएम मोदी ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर शोक जताया और X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “महाराष्ट्र के पुणे में हुई दुर्घटना से दुखी हूं। अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता दी जाएगी।”
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पुलिस और प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंच गई। फिलहाल इलाके में शोक का माहौल है। प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
सोमवार को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सोमवार को महाराष्ट्र के कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। कुंडेश्वर मंदिर भी एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां हर सोमवार को हजारों लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह हादसा न सिर्फ एक दुखद त्रासदी है, बल्कि अव्यवस्थित धार्मिक यात्राओं और ओवरलोडिंग जैसी लापरवाहियों का नतीजा भी है। प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि भविष्य में ऐसे आयोजन बेहतर योजना और सुरक्षा के साथ हों, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रहें।










