Punjab Floods 2025: पंजाब इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण बाढ़ संकटों में से एक से गुजर रहा है। राज्य के 9 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं और अब तक 1300 से अधिक गांव पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं। खेत, घर, पशु, स्कूल, सड़कें – सब जलमग्न हो चुके हैं। अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है, हजारों मवेशी बह गए हैं और लाखों लोग सड़कों व राहत शिविरों में दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।
बाढ़ की भयावह तस्वीरें तरनतारन, पठानकोट, फाजिल्का, अमृतसर, अजनाला, फिरोजपुर जैसे जिलों से सामने आ रही हैं। चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। वहीं पहाड़ी इलाकों से लगातार आ रहे पानी की वजह से सतलुज, ब्यास और रावी नदियों का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। इसने बांधों और तटबंधों पर भी जबरदस्त दबाव बना दिया है।
करमजीत (बदला हुआ नाम) की कहानी इस बाढ़ त्रासदी की दर्दनाक सच्चाई बयान करती है। उन्होंने 2023 में बड़ी मुश्किलों से अपना घर बसाया था। लेकिन 2025 की बाढ़ ने उनकी उम्मीदों, सपनों और आश्रय – सब कुछ बहा दिया। वह कहती हैं, “अब सारी जिंदगी लग जाएगी इससे उभरने में।” ऐसी कहानियां आज पंजाब के हर गांव, हर राहत कैंप, हर टूटे हुए घर में सुनने को मिल रही हैं।
बाढ़ ने न केवल इंसानों को बेघर किया, बल्कि पंजाब की कृषि व्यवस्था पर भी करारा प्रहार किया है। अब तक 94,061 हेक्टेयर फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। सबसे ज्यादा नुकसान मानसा (17,005 हेक्टेयर), कपूरथला (14,934), तरनतारन (11,883) और फिरोजपुर (11,232) में हुआ है।
मुख्यत: धान की फसल इस बाढ़ की चपेट में आई है। सरकार का इस वर्ष 180 लाख मीट्रिक टन धान उत्पादन का लक्ष्य था, लेकिन अब यह लक्ष्य अधर में लटक गया है। इसका सीधा असर केंद्रीय पूल में होने वाली धान की खरीद पर पड़ेगा, जिसमें पिछले साल 173 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई थी।
सरकार और राहत एजेंसियां मिलकर प्रयास कर रही हैं। अब तक 15,688 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। एनडीआरएफ की 20 टीमें, 114 नावें, और 1 हेलिकॉप्टर रेस्क्यू में जुटे हैं। वायुसेना और सेना के 35 हेलिकॉप्टर लगातार लोगों को जलभराव से निकाल रहे हैं।
गुरदासपुर: 5,549
फिरोजपुर: 3,321
फाजिल्का: 2,049
अमृतसर: 1,700
पठानकोट: 1,139
होशियारपुर: 1,052
अन्य जिलों में भी सैकड़ों लोगों को निकाला गया है।
राज्य में 129 राहत कैंप और 7,144 राहत शिविर सक्रिय हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन, चिकित्सा और शरण दी जा रही है।
हालांकि रेस्क्यू और राहत कार्य जारी हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह तबाही प्राकृतिक से ज़्यादा प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। कई स्थानों पर समय रहते जल निकासी, बांधों की मरम्मत और चेतावनी तंत्र को सक्रिय नहीं किया गया। परिणामस्वरूप गांवों में पानी घुस गया और लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला।
पंजाब की मिट्टी ने बहुत कुछ झेला है बंटवारे की पीड़ा, आतंकवाद, आर्थिक संकट, और अब ये बाढ़। फिर भी लोग कहते हैं “पंजाब रुका नहीं, झुका नहीं। ये दौर भी गुजर जाएगा।”
पंजाब इस वक्त इतिहास की एक बड़ी त्रासदी से जूझ रहा है। यह समय है न केवल राहत देने का, बल्कि यह सोचने का भी कि क्या आने वाले समय में हम प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार हैं? आज के हालात हमें यही सिखाते हैं कि नदियों को नियंत्रित करना, पर्यावरणीय चेतावनियों को गंभीरता से लेना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अब विलंबित नहीं किया जा सकता।
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