Su-57 in India: रूस ने भारत को रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव दिया है। रूस चाहता है कि उसका सबसे एडवांस्ड Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट भारत में ही बनाया जाए। इस प्रस्ताव के साथ रूस भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्थानीय उत्पादन और निवेश की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
Su-57, अमेरिका के F-35 और चीन के J-20 को टक्कर देने वाला पांचवीं पीढ़ी का मल्टी-रोल स्टील्थ फाइटर जेट है। इस पहल से भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता दोनों को जबरदस्त बल मिल सकता है।
निर्माता: सुखोई, रूस
रडार रिफ्लेक्टिव सतह: सिर्फ 0.1 वर्ग मीटर (बेहद स्टील्थी)
इंजन: 2× AL-41F1
गति: अधिकतम 2,450 किमी/घंटा
हथियार क्षमता: 10 टन तक (एयर-टू-एयर, क्रूज मिसाइलें)
रडार सिस्टम: N036 Byelka AESA रडार
AI सपोर्ट: लोयल विंगमैन मोड में ड्रोन ऑपरेट कर सकता है
परमाणु क्षमता: न्यूक्लियर वेपन्स ले जाने में सक्षम
कीमत: लगभग $50 मिलियन प्रति यूनिट (F-35 से किफायती)
प्रयोग: यूक्रेन युद्ध में सीमित रूप से इस्तेमाल
भारत और रूस का रक्षा संबंध शीत युद्ध काल से चला आ रहा है। भारत के करीब 60% हथियार रूसी तकनीक पर आधारित हैं। Su-30MKI इसका बेहतरीन उदाहरण है, जिसे HAL नासिक में बनाया गया।
2007 में शुरू हुआ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट, जिसमें Su-57 का भारत संस्करण बनना था, वह 2018 में ठप हो गया था। लेकिन अब रूस ने फिर से एक नया प्रस्ताव देते हुए Su-57E का ऑफर भारत को दिया है।
एयरो इंडिया 2025 में इस फाइटर को शोकेस किया गया, और रूस ने सुझाव दिया कि HAL नासिक प्लांट को अपग्रेड कर इसके लोकल प्रोडक्शन की शुरुआत की जा सकती है।
भारत को मिल सकता है फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट का अनुभव
AMCA प्रोजेक्ट को मिल सकती है तकनीकी सहायता
रोजगार में वृद्धि और मेक इन इंडिया को मजबूती
AI, रडार और स्टील्थ टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता
रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध (US CAATSA)
तकनीकी पारदर्शिता और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी पर संदेह
भारत की दीर्घकालिक रणनीति में पश्चिमी और स्वदेशी प्रोजेक्ट्स के साथ संतुलन बनाना
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह डील सफल होती है, तो भारत अगले 3-4 वर्षों में 20–30 Su-57 फाइटर जेट्स हासिल कर सकता है। साथ ही, यह कदम भारत को एशिया में चीन के मुकाबले खड़ा करने में मदद करेगा।
AMCA की पहली उड़ान जहां 2028 तक अपेक्षित है, Su-57 का लोकल निर्माण भारत को अंतरिम एडवांस्ड ऑप्शन देगा। रूस का Su-57 भारत में बनाना न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादकों की सूची में ऊपर ला सकता है। हालांकि, निर्णय जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि तकनीकी और भू-राजनीतिक मूल्यांकन के बाद ही लिया जाना चाहिए। अगर यह डील पक्की होती है, तो यह भारत के लिए आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
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