Punjab University Violence : पंजाब में दो प्रमुख निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन से माहौल तनावपूर्ण हो गया है। करीब 48 घंटे के भीतर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) और चितकारा यूनिवर्सिटी में अलग-अलग घटनाओं को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया। LPU में कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े दावों के बाद विरोध हिंसक होने की बात सामने आई, जबकि चितकारा यूनिवर्सिटी में दो छात्राओं की कथित आत्महत्या को लेकर सोशल मीडिया पर दावे प्रसारित हुए। पुलिस दोनों घटनाओं की अलग-अलग जांच कर रही है।
LPU में कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों से शुरू हुआ विवाद
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में रविवार तड़के गर्ल्स हॉस्टल-3 से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद छात्रों का विरोध शुरू हुआ। छात्रों की ओर से दावा किया गया कि परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति या विश्वविद्यालय कर्मचारी ने एक छात्रा के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया। कुछ छात्रों का आरोप है कि घटना कुछ दिन पहले हुई थी और मामले को विश्वविद्यालय स्तर पर उचित तरीके से नहीं संभाला गया।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैले कई दावे
मामले को लेकर सोशल मीडिया और छात्र समूहों में कई तरह की सूचनाएं तेजी से प्रसारित हुईं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि संबंधित छात्रा को बाद में उसके घर भेज दिया गया था। इसके बाद उसकी रूममेट द्वारा कथित तौर पर छात्रा की आत्महत्या की जानकारी दिए जाने की बात कही गई। हालांकि, इन दावों की सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
CCTV फुटेज को लेकर छात्रों ने उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और हॉस्टल वार्डन से CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की। छात्रों के बीच चर्चा रही कि फुटेज में एक महिला कर्मचारी के खाली कमरे में जाने के बाद तीन पुरुष कर्मचारियों के वहां पहुंचने की तस्वीरें दिखाई दीं। एक कर्मचारी के हाथ में बाल्टी होने की बात भी कही गई। कुछ छात्रों ने इससे कमरे की सफाई और संभावित सबूत हटाने की आशंका जताई, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस ने FIR दर्ज कर सात सदस्यीय SIT बनाई
LPU मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म से जुड़ा मामला दर्ज किया है। जांच के लिए सात सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT का गठन भी किया गया है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों, CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ दावों को गलत बताया है।
हिंसक प्रदर्शन के बाद LPU में दस दिन कक्षाएं स्थगित
प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद LPU प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमित कक्षाएं 28 सितंबर से दस दिनों के लिए स्थगित कर दी हैं। मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं। सोमवार सुबह बड़ी संख्या में छात्रों को परिसर से निकलकर अपने घरों की ओर जाते देखा गया।
चितकारा यूनिवर्सिटी में भी सोशल मीडिया दावों से तनाव
चितकारा यूनिवर्सिटी में भी सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं के बाद छात्रों में तनाव देखने को मिला। यहां दो छात्राओं द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या किए जाने का दावा किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। बताया गया कि 24 सितंबर की रात कुछ छात्रों ने कथित तौर पर चीखने की आवाजें सुनीं और परिसर में दो एंबुलेंस देखे जाने की बात कही गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
जवाब की मांग को लेकर परिसर में जुटे छात्र
घटनाक्रम को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की शिकायत करते हुए बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए। विरोध के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच एक पुलिस वाहन में आग लगाए जाने की बात भी सामने आई। प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
चितकारा में 1 अक्टूबर तक शैक्षणिक गतिविधियां बंद
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए चितकारा यूनिवर्सिटी ने 1 अक्टूबर तक शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित करने की घोषणा की। इसके बाद 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश और फिर सप्ताहांत होने के कारण नियमित कक्षाएं 5 अक्टूबर से शुरू होने की बात कही गई है। हालांकि, शिक्षक और अन्य कर्मचारी प्रशासनिक कार्यों के लिए अपने कार्यालयों में उपस्थित रहेंगे।
दोनों घटनाओं की जांच से साफ होगी वास्तविक स्थिति
LPU और चितकारा यूनिवर्सिटी में सामने आए घटनाक्रम के बाद छात्रों के बीच असमंजस और तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस LPU मामले में FIR और SIT जांच के जरिए तथ्यों को सामने लाने में जुटी है, जबकि चितकारा यूनिवर्सिटी से जुड़े दावों की भी जांच और निगरानी जारी है। फिलहाल दोनों घटनाओं के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही सोशल मीडिया पर सामने आए दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
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