Russia China Alliance: यूक्रेन युद्ध एक निर्णायक मोड़ पर आ पहुंचा है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की पुतिन से हालिया मुलाकात के बाद थोड़ी बहुत शांति की उम्मीद जगी थी, वहीं अब रूस के रुख ने एक बार फिर से वैश्विक तनाव को बढ़ा दिया है। ट्रंप की ओर से तय की गई समयसीमा खत्म होने में कुछ ही घंटे बचे हैं और रूस ने साफ कर दिया है कि वह किसी सीजफायर या समझौते को स्वीकार नहीं करेगा यदि वह उसके ‘राष्ट्रीय हितों’ के खिलाफ हुआ।

रूस का दो टूक जवाब
क्रेमलिन ने बयान जारी कर कहा है कि रूस वही करेगा जो उसके रणनीतिक हितों के अनुकूल होगा। रूस ने न केवल सीजफायर की संभावनाओं से इनकार किया है, बल्कि परमाणु हथियारों पर लगी सीमा को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया है। 1987 में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हुई INF संधि के तहत 500-5500 किमी रेंज की परमाणु मिसाइलों की तैनाती पर रोक थी। लेकिन अब रूस ने इस संधि से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है।

ट्रंप की दोहरी रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार अब कूटनीति और सैन्य दबाव दोनों के जरिए पुतिन को मनाने की कोशिश कर रही है। विटकॉफ के मॉस्को दौरे के साथ-साथ अमेरिका ने अलास्का के पास चुक्ची सागर में बड़ा सैन्य युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। यह इलाका रूस और अमेरिका के बीच सबसे कम दूरी पर स्थित है। NORAD ने पुष्टि की है कि ये अभ्यास पूरे महीने चलेगा और जल्द ही ब्रिटेन और डेनमार्क की नौसेनाएं भी इसमें शामिल होंगी।
नेतन्याहू भी मध्यस्थ की भूमिका में
इस संकट को टालने की कोशिश में अब इजराइल भी सामने आया है। बीते सात दिनों में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से दो बार बातचीत की है। करीब 40 मिनट तक चली बातचीत में नेतन्याहू ने युद्धविराम की संभावना पर जोर दिया और अमेरिका-रूस के बीच तनाव कम करने की अपील की। हालांकि अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
चीन भी मैदान में
सबसे बड़ा खतरा यह है कि रूस इस बार अकेला नहीं है। उसका ‘नो-लिमिट्स’ साझेदार चीन खुलकर उसके साथ खड़ा नजर आ रहा है। दोनों देशों की सेनाएं जापान के पास ईस्ट सी में साझा युद्धाभ्यास कर रही हैं। यह अमेरिका के सहयोगी जापान के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। जिस तरह अमेरिका ने रूस को कूटनीतिक और आर्थिक रूप से घेरने की रणनीति अपनाई है, उसी तरह रूस-चीन मिलकर एशिया और यूरोप में अमेरिका को टक्कर देने की तैयारी में हैं।
यूक्रेन युद्ध अब केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहा, यह एक वैश्विक शक्ति संघर्ष का रूप लेता जा रहा है। ट्रंप प्रशासन बातचीत से समाधान निकालना चाहता है, लेकिन पुतिन की रणनीति और चीन के साथ उसके बढ़ते सैन्य सहयोग ने दुनिया को महासंग्राम की कगार पर ला खड़ा किया है। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव किसी भी समय वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है।
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