LPG Cylinder Subsidy: केंद्र सरकार द्वारा ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के अंतर्गत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की वार्षिक संख्या को नौ से घटाकर चार किए जाने के फैसले पर देश में सियासत पूरी तरह गरमा गई है। इस नीतिगत बदलाव को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियों पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने कहा कि सरकार की पिछले 12 सालों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और पूरी तरह से समझौतापरस्त (Compromised) विदेश नीति का ही यह नतीजा है, जिसने आज पूरे देश को ऐसे बदतर हालात में लाकर खड़ा कर दिया है। इसके कारण आज देश के लाखों गरीब परिवारों और लाचार महिलाओं को एक बार फिर चूल्हे के जहरीले धुएं की तरफ लौटने के लिए मजबूर कर दिया गया है।

पहले दाम बढ़ाओ फिर सब्सिडी घटाओ
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के आंकड़ों को सामने रखते हुए सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या को अचानक 9 से घटाकर मात्र 4 कर दिया गया है। इसके ऊपर से सितम यह है कि पिछले महज 3 महीनों के भीतर ही घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में ₹89 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है।” उन्होंने तंज कसते हुए आगे कहा कि सरकार की रणनीति साफ है—पहले रसोई गैस के दाम बढ़ाओ, फिर गरीबों को मिलने वाली सब्सिडी घटाओ और अंततः गरीबों का चूल्हा बुझाओ।
प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा पर प्रहार
राहुल गांधी ने समाज के सबसे निचले और कामकाजी तबके यानी प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि शहरों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा माने जाने वाले 5 किलोग्राम के छोटे एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी ₹323 की बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी गई है। इतनी भारी महंगाई के बीच एक आम दिहाड़ी मजदूर के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष ने सवालिया लहजे में पूछा कि इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में देश का गरीब मजदूर आखिर कमाएगा क्या, खाएगा क्या और अपने भविष्य के लिए बचाएगा क्या?
अरबपति मित्रों की कर्जमाफी
अपने तीखे हमलों को जारी रखते हुए कांग्रेस सासंद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने चुनिंदा बड़े उद्योगपति मित्रों के हितों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, “अपने अरबपति मित्रों को लाखों-करोड़ों रुपये की कर्जमाफी का तोहफा दिलाना और देश के करोड़ों गरीबों को अपनी प्रशासनिक व आर्थिक नाकामियों का बिल थमा देना—यही असल में लूट का ‘मोदी मॉडल’ है।” राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री से सवाल पूछते हुए कहा, “मोदी जी, क्या आपकी सरकार की तमाम आर्थिक विफलताओं का आर्थिक बोझ सिर्फ देश का गरीब ही उठाएगा? क्या आपकी बनाई इस चरमराती और कमजोर अर्थव्यवस्था की भारी कीमत हमेशा देश का मजदूर, किसान, गरीब महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?”

केंद्र सरकार की सफाई
दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी के दायरे को सीमित करने के अपने फैसले पर केंद्र सरकार ने सोमवार (8 जून 2026) को आधिकारिक सफाई पेश की है। सरकार की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि यह बड़ा बदलाव लाभार्थियों की वास्तविक और ‘औसत घरेलू खपत’ को ध्यान में रखते हुए ही किया गया है। गौरतलब है कि साल 2016 में जब इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत हुई थी, तब इसके पंजीकृत लाभार्थियों को एक वित्तीय वर्ष में 14.2 किलोग्राम वाले कुल 12 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलती थी। हालांकि, समय के साथ नियमों को कड़ा करते हुए पिछले साल इस संख्या को घटाकर नौ किया गया था, जिसे अब और कम करके सालाना केवल चार सिलेंडर तक सीमित कर दिया गया है।
पश्चिम एशिया संकट का असर
सरकार ने इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय राहत के इतिहास का ब्योरा देते हुए बताया कि मई 2022 में पहली बार उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए ₹200 प्रति सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी शुरू की गई थी, जिसे बाद में अक्टूबर 2023 में राहत बढ़ाते हुए ₹300 कर दिया गया था। यह सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थियों के आधार लिंक बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। सरकार ने इस कटौती के पीछे वैश्विक परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्तमान में जारी पश्चिम एशिया संकट (Middle East Crisis) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और एलपीजी की वैश्विक कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता देखी जा रही है, जिसका सीधा और प्रतिकूल वित्तीय असर भारत के राजकोष पर भी पड़ा है।
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