Rahul Gandhi On ECI : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को बिहार में अपनी मतदाता अधिकार यात्रा के दौरान चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले चोरी “छुपकर” होती थी, लेकिन अब SIR (Special Intensive Revision) के जरिए खुलेआम वोट चोरी की जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है और मतदाता सूचियों में हेराफेरी करके विपक्षी वोटों को कमजोर किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने अब SIR को वोट चोरी का नया तरीका बना लिया है। उन्होंने कहा:
“पहले छुपकर चोरी करते थे, अब SIR से खुलेआम कर रहे हैं। बिहार में हम वोट चोरी नहीं होने देंगे।”
उन्होंने सवाल उठाया कि सीसीटीवी कानून क्यों बदला गया? चुनाव आयुक्तों पर मुकदमा न चलाने वाला कानून 2023 में क्यों लाया गया? राहुल गांधी का कहना था कि यह बदलाव सिर्फ इसलिए किया गया ताकि चुनाव आयोग पर कोई कार्रवाई न हो सके और सरकार के साथ मिलकर चुनावी हेराफेरी की जा सके।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच 1 करोड़ नए मतदाता बनाए गए।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को जितने वोट मिले, विधानसभा चुनाव में भी उतने ही वोट मिले।
लेकिन नए मतदाताओं के वोट सीधे भाजपा को मिले और वह जीत गई।
जब कांग्रेस ने चुनाव आयोग से नए मतदाताओं की सूची, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल मतदाता डेटा मांगा, तो आयोग ने जानकारी देने से इनकार कर दिया।
महाराष्ट्र में वयस्क आबादी से अधिक वोट कैसे हो गए?
– कोई जवाब नहीं।
एक ही घर में इतने सारे मतदाता कैसे पंजीकृत हो गए?
– कोई जवाब नहीं।
बिहार में इतनी जल्दी SIR क्यों कराया जा रहा है?
– कोई जवाब नहीं।
बाढ़ प्रभावित बिहार में अभी SIR करवाना कितना ज़रूरी है?
– कोई ठोस जवाब नहीं।
बूथ पर वीडियोग्राफी क्यों नहीं की जाती?
– चुनाव आयोग का तर्क था कि यह महिलाओं की निजता का उल्लंघन है।
– कांग्रेस का सवाल: मतदान केंद्रों पर जब महिलाएँ पहचान सत्यापन के लिए चेहरा दिखाती हैं, तो वहाँ निजता का क्या होता है?
एक व्यक्ति के कई वोट कैसे संभव हैं?
– चुनाव आयोग का जवाब था कि “एक ही नाम वाले हजारों लोग हो सकते हैं।”
– कांग्रेस का सवाल: अगर नाम, पिता/पति का नाम और पता भी एक जैसा है, तो यह कैसे संभव है?
डिजिटल, मशीन-पठनीय मतदाता सूची क्यों उपलब्ध नहीं कराई जाती?
– आयोग का कहना था कि यह निजता का उल्लंघन है।
– कांग्रेस का आरोप: वास्तव में, डिजिटल सूची से वोट चोरी पकड़ना आसान हो जाएगा।
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका संदिग्ध हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि:
चुनाव आयोग सरकार के साथ मिलकर वोट चोरी कर रहा है।
‘एक व्यक्ति, एक वोट’ का सिद्धांत खत्म किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर दिया ताकि “कठपुतली” आयुक्त नियुक्त किए जा सकें।
कांग्रेस का बयान: संविधान की हत्या
वोट चोरी रोकना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना उनका कर्तव्य है।
अगर “वोट चोरी” शब्द आपको परेशान करता है, तो खुलेआम हो रही धांधली को रोकें।
लोकतंत्र से छेड़छाड़ करने वालों को कानून माफ नहीं करेगा।
राहुल गांधी के इस हमले ने बिहार की राजनीति को गरमा दिया है। एक तरफ चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ आयोग बार-बार अपने कदम को सही ठहरा रहा है। सवाल यह है कि क्या SIR वाकई पारदर्शिता लाएगा या विपक्ष के आरोप सही साबित होंगे?
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