NEET Re-Exam 2026 : नीट (NEET) परीक्षा से जुड़ी विवादित घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में नागपुर के एक छात्र को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा परीक्षा के लिए अबू धाबी (विदेशी) सेंटर आवंटित करने का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। परीक्षा से ठीक एक दिन पहले एडमिट कार्ड डाउनलोड करने पर छात्र को जब अपने सेंटर का पता चला, तो उसके होश उड़ गए। इस छात्र के पास न तो पासपोर्ट है और न ही उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वे उसे विदेश भेज सकें। यह स्थिति छात्र के लिए किसी गहरे सदमे से कम नहीं है, जिसके कारण वह पूरी रात रोता रहा और उसने परीक्षा देने से ही मना कर दिया।

राहुल गांधी का तीखा हमला: ‘NTA बच्चों के धैर्य की परीक्षा ले रही है’
इस मामले पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने छात्र के मानसिक तनाव पर चिंता जताते हुए कहा, “क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?” उन्होंने NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जो सिस्टम एक छात्र को उसके अपने शहर में केंद्र नहीं दे सकता और उसे विदेश भेज रहा है, उसे परीक्षा आयोजित करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। राहुल गांधी के अनुसार, NTA असल में देश के बच्चों और उनके अभिभावकों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। उन्होंने जोर दिया कि कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुंच पाने की कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए।

‘शिक्षा व्यवस्था नहीं, अब यह एक वसूली का जरिया बन गई है’
राहुल गांधी ने कोटा की अपनी हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह वर्तमान शिक्षा व्यवस्था अब केवल एक परीक्षा प्रणाली नहीं रह गई है। उन्होंने इसे एक ऐसी व्यवस्था बताया है जो एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की ‘वसूली’ कर रही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ जुआ खेलना तुरंत बंद किया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने संकल्प लिया कि वे छात्रों को एक संवेदनशील, जिम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली दिलाकर रहेंगे। उनके इस बयान ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग को और तेज कर दिया है।
NTA की सफाई: जल्द बदलेगा छात्र का परीक्षा केंद्र
हंगामे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मामले पर अपनी सफाई पेश की है। NTA के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें छात्र की शिकायत प्राप्त हो गई है और इस पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि जरूरी जांच-पड़ताल और प्रक्रिया पूरी करने के बाद, अगले कुछ घंटों में ही उस छात्र को नागपुर में ही एक उपयुक्त परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया जाएगा। हालांकि, यह घटना NTA की तकनीकी दक्षता और परीक्षा प्रबंधन की खामियों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है, जिससे छात्रों में व्याप्त असुरक्षा और अधिक बढ़ गई है।
परीक्षा प्रणाली की साख पर लगा बड़ा दाग
देश भर के लाखों छात्र, जो अपनी मेहनत और सपनों के साथ इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, उनके लिए इस तरह की प्रशासनिक गलतियां किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। NTA की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में रही है, और इस प्रकार के मामले उस साख को और अधिक कमजोर करते हैं। समय रहते परीक्षा केंद्र में सुधार का आश्वासन तो दे दिया गया है, लेकिन छात्र और उनके अभिभावक अभी भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि भविष्य में उन्हें किस प्रकार की और चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। अब सबकी निगाहें NTA के अगले कदम और परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाए गए कदमों पर टिकी हैं।
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