Rahul Gandhi Defamation Case: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में निचली अदालत में चल रही ट्रायल की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।
राफेल सौदे पर बयान से जुड़ा है मामला
यह मामला वर्ष 2018 में राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राहुल गांधी की ओर से की गई कथित टिप्पणियों से संबंधित है। आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘कमांडर-इन-थीफ’ और ‘चोरों के सरदार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इन टिप्पणियों को लेकर बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का दावा था कि कथित बयान से प्रधानमंत्री के अलावा भारतीय जनता पार्टी और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा।
निचली अदालत ने जारी किया था समन
शिकायत पर सुनवाई करते हुए मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने समन और आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को चुनौती दी। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दलील दी कि उनके बयान में किसी राजनीतिक दल का स्पष्ट रूप से नाम नहीं लिया गया था। इसलिए, उनके अनुसार, शिकायतकर्ता यह साबित किए बिना मानहानि की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ा सकता कि कथित टिप्पणी किसी स्पष्ट और पहचान योग्य व्यक्ति या समूह के विरुद्ध थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की थी
राहुल गांधी की दलीलों पर विचार करने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट का कहना था कि भारतीय जनता पार्टी एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और उसे पहचान योग्य समूह के रूप में देखा जा सकता है। अदालत के अनुसार, कथित टिप्पणी से पार्टी या उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ा, इस सवाल की जांच ट्रायल के दौरान की जा सकती है। इस तरह हाई कोर्ट ने आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
शशि थरूर के मामले का भी हुआ था उल्लेख
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में शशि थरूर से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया था। उस मामले में पंजीकृत राजनीतिक दल को पहचान योग्य इकाई मानने के सवाल पर विचार किया गया था। इसी कानूनी संदर्भ के आधार पर राहुल गांधी की याचिका पर हाई कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट किया था।
सुप्रीम कोर्ट में अब आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और निचली अदालत की ट्रायल कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई है। इस आदेश से मामले की आगे की सुनवाई तक राहुल गांधी को अस्थायी राहत मिली है। हालांकि, इसे मानहानि के आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। आगे की सुनवाई में अदालत याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।
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