Rahul Gandhi in Kota : कोटा के शैक्षणिक हब में छात्रों के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य—यानी युवाओं—और उनके दैनिक जीवन में आने वाली चुनौतियों को समझने का एक प्रयास है। राहुल गांधी ने कहा कि वे छात्रों के बीच आकर बेहद सम्मानित महसूस कर रहे हैं। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को सुनना और उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि उनके विचार देश के लिए अत्यंत मूल्यवान हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि यह शाम पूरी तरह से उनके सपनों और उनके संघर्षों को समर्पित है।

केवल पांच करियर विकल्प क्यों? शिक्षा प्रणाली की सीमाओं पर सवाल
अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का स्मरण करते हुए राहुल गांधी ने बताया कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक की पदयात्रा के दौरान उन्होंने लाखों युवाओं से संवाद किया। उन्होंने साझा किया कि जब उन्होंने युवाओं से उनके सपनों के बारे में पूछा, तो उन्हें एक हैरान करने वाला पैटर्न दिखा। अधिकांश युवाओं के पास केवल पांच ही जवाब थे—इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, आईएएस या फौजी बनना। इस अनुभव ने उन्हें गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर हमारी शिक्षा प्रणाली हमारे बच्चों को केवल सीमित दायरे में ही क्यों कैद कर रही है? उन्होंने चिंता जताई कि भारत का भविष्य कहे जाने वाले युवाओं के लिए शिक्षा व्यवस्था में अवसरों की इतनी कमी क्यों है और शिक्षा उन्हें केवल कुछ चुनिंदा रास्तों पर ही चलने के लिए क्यों विवश करती है।

शिक्षा का बढ़ता दबाव और छात्रों की आत्महत्या की समस्या
राहुल गांधी ने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों पर प्रहार करते हुए कहा कि पब्लिक सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था का पतन और प्राइवेट सेक्टर की अत्यधिक महंगी शिक्षा ने छात्रों के लिए एक तनावपूर्ण वातावरण बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर भारी दबाव डालती है, उन्हें तनावग्रस्त करती है और उनके मानसिक स्वास्थ्य को कुचल देती है। यह देश के लिए एक बेहद गंभीर और दुखद स्थिति है। राहुल गांधी का मानना है कि हम सभी को मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जहाँ किसी भी छात्र को कभी भी हताशा में आकर खुदकुशी जैसे चरम कदम उठाने का विचार तक न आए। उनका आह्वान था कि हमें भारत की शिक्षा नीति में मौजूद त्रुटियों को पहचानना होगा और उसमें तत्काल सुधार करना होगा।
नीट की तैयारी और परीक्षा का तनाव: एक चिंताजनक विषय
कोटा जैसे शहरों में अक्सर नीट और जेईई जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान छात्रों द्वारा अत्यधिक दबाव के चलते आत्महत्या करने की खबरें सामने आती हैं, जो पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। राहुल गांधी का यह संवाद इसी संवेदनशील मुद्दे को संबोधित करता है। यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि कोई भी परीक्षा या करियर का विकल्प जीवन से बड़ा नहीं होता। छात्रों को यह समझाने की जरूरत है कि असफलता या परीक्षाओं में देरी जीवन का अंत नहीं है, बल्कि समस्या का डटकर सामना करना और आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है। समाज, शिक्षा संस्थानों और अभिभावकों को मिलकर एक ऐसा सपोर्ट सिस्टम तैयार करना होगा, जहाँ छात्र सुरक्षित महसूस करें और मानसिक रूप से सशक्त होकर अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ सकें।
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