Rahul Gandhi RSS Statement : राहुल गांधी का RSS पर बड़ा बयान, PM मोदी को घेरते हुए बदला अंदाज

Rahul Gandhi RSS Statement : रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन में लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाए और प्रेस से संवाद को लेकर अपनी राय रखी। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में नेताओं और जनता के बीच सीधा संवाद बेहद जरूरी है।

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प्रधानमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर उठाया सवाल

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नियमित रूप से पत्रकारों के सवालों का सामना क्यों नहीं करते हैं। राहुल गांधी ने बताया कि पहले उन्हें लगता था कि प्रधानमंत्री का प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी बनाए रखना किसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने इसे मार्केटिंग रणनीति मानने की बात भी कही।

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मोदी के साथ बैठक का किया जिक्र

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के साथ हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ समय उनके साथ एक कमरे में बैठने के बाद उनकी धारणा बदल गई। राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्हें ऐसा लगा कि प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की बातचीत करना आसान नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस टिप्पणी के जरिए प्रधानमंत्री की कार्यशैली और सार्वजनिक संवाद के तरीके पर राजनीतिक सवाल खड़े किए।

रचनात्मक कांग्रेस का मतलब समझाया

राहुल गांधी ने सम्मेलन में ‘रचनात्मक कांग्रेस’ की अवधारणा को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि रचनात्मक कांग्रेस का मूल अर्थ अपनी बात को व्यक्त करना और विचारों को खुलकर सामने रखना है। उनके अनुसार लोगों को अपने मन की बात कहने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने अभिव्यक्ति को लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कार्यकर्ताओं से खुलकर अपनी राय रखने का आह्वान किया।

अभिव्यक्ति की आजादी पर राहुल का बयान

राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में केवल अपने विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि असहमति रखने वालों को भी अपनी बात कहने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के मन में जो विचार हैं, उन्हें खुलकर व्यक्त करने की अनुमति होनी चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र तभी मजबूत हो सकता है जब समाज में अलग-अलग विचारों और मतों के लिए जगह बनी रहे।

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आरएसएस को लेकर भी दिया बड़ा बयान

आरएसएस को लेकर राहुल गांधी ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कभी आरएसएस की अभिव्यक्ति को खत्म करने की बात होगी तो वह संगठन की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करेंगे। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनके विचार आरएसएस की विचारधारा से अलग हो सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उसके सदस्यों की बोलने की आजादी समाप्त कर दी जाए।

विरोधी विचारों के अधिकार की वकालत

राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में किसी भी व्यक्ति या संगठन के विचारों से असहमति होना अलग बात है और उसकी अभिव्यक्ति पर रोक लगाना अलग। उन्होंने कहा कि वह इस सिद्धांत में विश्वास रखते हैं कि हर व्यक्ति को अपने दिल और मन की बात खुलकर कहने का अधिकार होना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने आरएसएस के मामले में भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करने की बात कही।

लोकतंत्र में संवाद को बताया जरूरी

राहुल गांधी के संबोधन का एक प्रमुख मुद्दा संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता रहा। उन्होंने राजनीतिक दलों और आम नागरिकों के बीच खुले संवाद की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में सवाल पूछना, जवाब देना और अलग विचार रखना स्वाभाविक प्रक्रिया है। सत्ता में बैठे लोगों को भी जनता और मीडिया के सवालों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दिया संदेश

रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन के मंच से राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी अपनी बात मजबूती से रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संगठन में विचारों की अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, रचनात्मक राजनीति का मतलब केवल विरोध करना नहीं, बल्कि विचारों को सामने रखना और लोकतांत्रिक तरीके से बहस को आगे बढ़ाना भी है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनी चर्चा का केंद्र

राहुल गांधी के इस संबोधन के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक संवाद का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर उनकी टिप्पणी जहां राजनीतिक बहस का विषय बनी, वहीं आरएसएस की अभिव्यक्ति की रक्षा करने वाले बयान ने भी ध्यान खींचा। राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह संदेश देने की कोशिश की कि लोकतंत्र में विरोधी विचारों को भी अपनी बात रखने का समान अधिकार मिलना चाहिए।

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Chandan Das

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