Rahul Gandhi ने तीन बिलों की आलोचना की, कहा- लोकतंत्र को मध्ययुगीन युग में धकेला जा रहा

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने बुधवार को तीन नए बिलों की तीखी आलोचना की। ये बिल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होने पर 30 दिन की हिरासत में रहने पर पद से हटाने से संबंधित हैं। राहुल गांधी ने कहा कि इन बिलों से देश को मध्ययुगीन युग में वापस धकेलने की कोशिश की जा रही है, जब राजा किसी को भी अपने मन मुताबिक गिरफ्तार करवा देते थे।

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बी. सुदर्शन रेड्डी के सम्मान समारोह में राहुल का भाषण

राहुल गांधी यह टिप्पणी संविधान सदन (पुरानी संसद) के सेंट्रल हॉल में आयोजित विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के सम्मान समारोह के दौरान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब निर्वाचित प्रतिनिधियों की कोई सुरक्षा नहीं बची है। उनका कहना था, “अगर किसी को आपका चेहरा पसंद नहीं है, तो ED से केस करा दिया जाता है और 30 दिन में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए व्यक्ति को खत्म कर दिया जाता है।”

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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के संदर्भ में चिंता

राहुल गांधी ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का जिक्र करते हुए कहा कि वे छुपे हुए क्यों हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसा क्यों है कि वे राज्यसभा में जोरदार बोलने के बावजूद अब चुप हैं और इस्तीफा देने के बाद सार्वजनिक रूप से गायब हो गए हैं। राहुल ने कहा कि यह सोचने की बात है कि ऐसे दौर में पूर्व उपराष्ट्रपति भी एक शब्द नहीं बोल सकते।

बिलों की घोषणा और विरोध

20 अगस्त 2025 को लोकसभा में तीन बिल पेश किए गए, जो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी होने पर 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद से हटाने के प्रावधान करते हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने इन बिलों को विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा में पेश किया।

लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों पर प्रभाव

राहुल गांधी ने कहा कि ये बिल लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों के लिए बड़ा खतरा हैं। उन्होंने बताया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता और जनता के मतदान के महत्व को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुने हुए नेताओं को इस तरह से निशाना नहीं बनाया जाता।

विपक्ष की भूमिका और चिंता

राहुल गांधी ने विपक्ष की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार का यह कदम संवैधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने सभी लोकतंत्र समर्थक दलों से अपील की कि वे इस तरह के कदम के खिलाफ आवाज उठाएं और संवैधानिक ढांचे की रक्षा करें।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य

राहुल गांधी ने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद के बाहर और जनता के बीच उठाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून पारित करने का मतलब है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की आवाज़ दबाई जा रही है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने भविष्य में व्यापक विरोध और लोकतांत्रिक आंदोलन की संभावना का इशारा किया।

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