Raigarh Elephant
Raigarh Elephant : छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला इन दिनों वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों की बढ़ती सक्रियता के कारण चर्चा में है। धरमजयगढ़ वन मंडल के अंतर्गत आने वाले विभिन्न क्षेत्रों में हाथियों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है, जिससे वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों की चिंताएं गहरी हो गई हैं। हाल ही में छाल रेंज में हाथियों के एक विशाल दल की मौजूदगी ने प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने को मजबूर कर दिया है।
रायगढ़ जिले के छाल वन परिक्षेत्र में हाथियों का एक विशाल समूह देखा गया है, जिसमें कुल 35 हाथी शामिल हैं। सोमवार की शाम छाल रेंज के बोजिया परिसर स्थित पेलमबांध के समीप इस दल को विचरण करते हुए पाया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने जब जंगल की ओर हाथियों के इस भारी-भरकम झुंड को देखा, तो उन्होंने इसका वीडियो बना लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस विशिष्ट दल में 3 नर, 25 मादा और 7 नन्हे शावक शामिल हैं। हाथियों का यह समूह घरघोड़ा क्षेत्र से होते हुए छाल रेंज की सीमा में दाखिल हुआ है।
हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष को रोकने के लिए तैनात ‘हाथी मित्र दल’ लगातार मैदानी स्तर पर निगरानी कर रहा है। छाल रेंज से सामने आए एक दिलचस्प वीडियो में देखा गया कि जब हाथियों का दल सड़क के करीब पहुंच गया था, तब हाथी मित्र दल के एक सदस्य ने अपनी आवाज के माध्यम से हाथियों को निर्देशित किया, जिसके बाद गजराज का यह दल सुरक्षित रूप से वापस घने जंगल की ओर लौट गया। इससे पहले भी इस तरह के सफल प्रयास किए जा चुके हैं, जिससे जान-माल के नुकसान को टाला जा सका है। हालांकि, हाथियों की भारी संख्या को देखते हुए खतरा अभी टला नहीं है।
वन विभाग द्वारा जारी ताजा गणना के अनुसार, वर्तमान में रायगढ़ जिले में कुल 123 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें से अकेले धरमजयगढ़ वन मंडल में 120 हाथी डेरा डाले हुए हैं, जबकि रायगढ़ रेंज में 3 हाथी सक्रिय हैं। हाथियों के वितरण पर नजर डालें तो छाल रेंज में सबसे अधिक 59 हाथी हैं, धरमजयगढ़ रेंज में 48 और लैलूंगा रेंज में 13 हाथियों का विचरण जारी है। पूरे जिले के कुनबे में कुल 36 नर, 62 मादा और 26 शावक शामिल हैं। शावकों की इतनी बड़ी संख्या इस बात का संकेत है कि इस क्षेत्र में हाथियों का परिवार तेजी से विस्तार कर रहा है।
हाथियों के गांवों के करीब पहुंचने की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। बोजिया, औरानारा मार्ग, गड़ाईनबहरी और सिंघीझाप जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया गया है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे शाम के समय और रात के अंधेरे में अकेले जंगल की ओर न जाएं। छाल रेंज अधिकारी राजेश चौहान ने बताया कि हाथियों की पल-पल की लोकेशन ट्रेस करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। विभाग ड्रोन कैमरों और जमीनी टीमों के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
वन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास में सीमित रखना और उन्हें बस्तियों की ओर आने से रोकना है। हाथियों के बढ़ते कुनबे के कारण वे अक्सर भोजन और पानी की तलाश में रिहायशी इलाकों का रुख करते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को सचेत रहने के साथ-साथ हाथियों को परेशान न करने की हिदायत भी दी गई है। वन विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में तैनात है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संसाधनों को दुरुस्त रखा गया है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित किसानों को फसल सुरक्षा के प्रति भी जागरूक किया है।
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