Rain Ritual Tradition : बारिश के लिए अनोखा टोटका, 108 नारियल-नींबू माला और रहस्यमयी पत्थर की कहानी

Rain Ritual Tradition : विज्ञान के इस आधुनिक दौर में भी भारत के ग्रामीण अंचलों में कई ऐसी प्राचीन परंपराएं जीवित हैं, जो आज भी लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बनी हुई हैं। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला नजारा आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के उरावकोंडा कस्बे में स्थित ऐतिहासिक ‘जम्मी अंकलम्मा मंदिर’ में देखने को मिला। मानसून की बेरुखी और बारिश न होने से परेशान किसानों ने फसलें बचाने और खेतों को हरा-भरा करने के लिए एक बेहद अनोखी और प्राचीन पूजा-अर्चना का सहारा लिया। इस अनुष्ठान में गांव के सात अविवाहित युवकों द्वारा निभाई गई एक विशेष रस्म न केवल आकर्षण, बल्कि कौतूहल का विषय बन गई।

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108 के अंक का महत्व और विशेष महाअभिषेक

बुवाई का मुख्य समय बीत जाने और बारिश न होने से किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही थीं। उरावकोंडा के ग्रामीणों ने अपनी पीढ़ियों से चली आ रही एक अनोखी परंपरा का पालन किया। अनुष्ठान के तहत, गांव के सात कुंवारे युवकों ने पूरी निष्ठा के साथ पवित्र जल से भरे 108 पात्र उठाए और मंदिर परिसर में स्थित पवित्र शमी और नाग वृक्ष पर इनका महाअभिषेक किया। इस दौरान मंदिर में भव्य धार्मिक अनुष्ठान हुआ, जिसमें 108 अंक की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा गया। ज्वार के ढेरों पर एक नया जलपात्र स्थापित कर उसे हल्दी, केसर और फूलों से सजाया गया और विशेष मंत्रोच्चार के साथ देवी की स्तुति की गई।

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नींबू-नारियल का चढ़ावा और रहस्यमयी रस्म

पूजा के दौरान देवी जम्मी अंकलम्मा को प्रसन्न करने के लिए 108 नारियल फोड़े गए और नींबू की एक विशेष माला बनाकर अर्पित की गई। इस पूजा का सबसे रोमांचक और रोंगटे खड़े कर देने वाला हिस्सा वह रस्म थी, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर के प्रांगण में ज्वार के दानों को एक घेरे में फैलाया गया और बीच में एक गोल पत्थर रखा गया। बारिश की मन्नत मांगने वाला युवक जैसे ही उस गोल पत्थर पर बैठा, वह पत्थर युवक के साथ तेजी से अपने आप गोल-गोल घूमने लगा। बिना किसी बाहरी सहारे के युवक को पत्थर पर चक्र की तरह घूमते देख वहां मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए।

लोक मान्यता: पत्थर घूमेगा, तो होगी झमाझम बारिश

इस चमत्कारी रस्म को लेकर स्थानीय बुजुर्गों और ग्रामीणों का विश्वास अटूट है। लोगों का मानना है कि यदि यह पत्थर रीति-रिवाज के अनुसार सुचारू रूप से घूमता है, तो इसका अर्थ है कि देवी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली है। ग्रामीण पूरी तरह आश्वस्त हैं कि इस रस्म के सफल होने के बाद क्षेत्र में जल्द ही मूसलाधार बारिश होगी, जिससे किसानों के संकट दूर हो जाएंगे। पत्थर के बेहतरीन ढंग से घूमने की इस घटना ने किसानों में नई उम्मीद जगा दी है। आधुनिकता की तमाम दौड़ के बीच, यह घटना यह दर्शाती है कि भारतीय गांवों में प्रकृति को रिझाने के लिए आज भी लोक परंपराओं और आस्था का महत्व कितना गहरा है। क्या आप ऐसी ही अन्य लोक मान्यताओं या दक्षिण भारत की विशेष परंपराओं के बारे में जानना चाहते हैं?

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Chandan Das

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