Raipur Chinese Manjha
Raipur Chinese Manjha: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मकर संक्रांति के पर्व से पहले चाइनीज मांझे से हो रहे हादसों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हाल ही में हुई गंभीर घटनाओं के बाद रायपुर नगर निगम एक्शन मोड में आ गया है। निगम के जोन-1 और जोन-5 की टीमों ने छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों के साथ मिलकर शहर के विभिन्न पतंग बाजारों का औचक निरीक्षण किया। इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान कई दुकानों में प्रतिबंधित नायलॉन और चाइनीज मांझा पाया गया, जिसे टीम ने तुरंत जब्त कर लिया। प्रशासन ने न केवल स्टॉक सीज किया, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर भारी जुर्माना भी ठोका है।
कार्रवाई का मुख्य केंद्र जोन-1 का बाल गंगाधर तिलक वार्ड रहा। यहाँ गुढ़ियारी स्थित प्रयास हॉस्टल के पास संचालित पतंग दुकानों की बारीकी से जांच की गई। वार्ड पार्षद सोहन साहू और स्वास्थ्य अधिकारी खेमराज देवांगन के नेतृत्व में टीम ने अवैध मांझे के बंडल बरामद किए। इसी तरह जोन-5 के घासीदास प्लाजा और आमापारा मार्ग पर सड़क किनारे लगी अस्थाई दुकानों को हटाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दुकानदारों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि यदि दोबारा प्रतिबंधित मांझा मिला, तो दुकानों को स्थायी रूप से सील कर दिया जाएगा।
निगम की यह तत्परता रविवार को हुए एक दिल दहला देने वाले हादसे के बाद आई है। लाखेनगर इलाके में शाम करीब 5 बजे एक महिला पैदल मंदिर जा रही थी, तभी अचानक आसमान से गिरता हुआ घातक मांझा उनके चेहरे पर फंस गया। मांझा इतना धारदार था कि उसे हटाने की कोशिश में महिला के होंठ और हाथ का अंगूठा बुरी तरह कट गया। सड़क पर लहूलुहान हालत में देख स्थानीय लोगों ने तुरंत उनकी मदद की और अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टर के मुताबिक, महिला के चेहरे पर 10 टांके लगाने पड़े। इस घटना ने शहरवासियों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और प्रतिबंधों के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं।
ऐसा नहीं है कि यह कार्रवाई पहली बार हुई है। नगर निगम का दावा है कि वे लगातार बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। 27 दिसंबर को भी शहर के प्रमुख केंद्रों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें बूढ़ातालाब स्थित सिटी पतंग भंडार और मोती पतंग भंडार से कुल 3 किलो मांझा मिला था। वहीं सदर बाजार के संजय पतंग भंडार से डेढ़ किलो और गोलबाजार के संगम काइट सेंटर में भी अवैध स्टॉक की जांच की गई थी। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि चोरी-छिपे अब भी यह जानलेवा धागा बेचा जा रहा है, जो आए दिन राहगीरों और पक्षियों के लिए काल बन रहा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने साल 2017 में ही कांच की परत वाले नायलॉन और चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत, प्रतिबंधित मांझे की बिक्री या उपयोग करते पाए जाने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या 5 साल की जेल का प्रावधान है। यदि मामला अधिक गंभीर हो और किसी की जान पर बन आए, तो यह जुर्माना 5 लाख रुपये तक भी जा सकता है। रायपुर में पिछले साल जनवरी 2025 में एक 7 साल के मासूम ‘पुष्कर’ की मांझे से गला कटने के कारण मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल त्योहार तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में ड्रोन और मुखबिरों की मदद से उन गोदामों की पहचान की जाएगी जहाँ से यह अवैध सप्लाई चेन जुड़ी हुई है। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे सूती धागे (सद्दी) का ही उपयोग करें और यदि कहीं भी चाइनीज मांझा बिकता देखें, तो तुरंत निगम के हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। सुरक्षा और सतर्कता ही इस जानलेवा खेल को रोकने का एकमात्र उपाय है।
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