Raipur Police Commissioner
Raipur Police Commissioner: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आगामी 23 जनवरी से प्रदेश की पहली पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने जा रही है। शुरुआती योजना के अनुसार इसे केवल नगर निगम सीमा तक सीमित रखा जाना था, लेकिन अब इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाने की गंभीर तैयारी चल रही है। सरकार नवा रायपुर, अटल नगर और माना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी इसमें शामिल करने पर विचार कर रही है। हालांकि, हालिया कैबिनेट बैठक में इस पर औपचारिक चर्चा नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इसे लेकर हलचल तेज है।
कैबिनेट बैठक के पश्चात गृह मंत्री विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में चर्चा हुई कि कमिश्नरी सिस्टम को केवल शहर तक सीमित न रखकर पूरे जिले में लागू किया जाए। गृह मंत्री ने एडीजी कमेटी को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था की दृष्टि से पूरे जिले में एक ही सिस्टम होना बेहतर है। मुख्यमंत्री इस विषय पर जल्द ही अंतिम मुहर लगा सकते हैं।
दैनिक भास्कर द्वारा किए गए एक सर्वे में रायपुर की जनता ने इस बदलाव का पुरजोर समर्थन किया है। सर्वे के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि पुलिस कमिश्नरी का दायरा बढ़ाकर इसमें नवा रायपुर को भी जोड़ा जाए। स्थानीय लोगों का मानना है कि विकासशील क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम जरूरी हैं, जो केवल एक सशक्त कमिश्नरी प्रणाली से ही संभव हैं।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजी अन्वेष मंगलम ने भी इस पहल की सराहना की है। उनका तर्क है कि जब किसी राज्य का ‘लॉ एंड ऑर्डर’ मजबूत होता है, तो वहां औद्योगिक निवेश बढ़ता है। इससे न केवल स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, बल्कि शासन के प्रति आम जनता का विश्वास भी गहरा होता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सुदृढ़ कानून व्यवस्था के कारण ही सरकार को भारी जनसमर्थन मिला।
31 दिसंबर 2025 की कैबिनेट बैठक में इस प्रणाली को मंजूरी मिली थी, लेकिन 21 दिन बीत जाने के बाद भी इसका अंतिम खाका (Blue Print) तैयार नहीं हो पाया है। सूत्रों के अनुसार, कुछ आईएएस अधिकारी पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने के पक्ष में नहीं हैं। वे चाहते हैं कि पुलिस प्रशासन के अधीन ही कार्य करे। अधिकारों के इसी खींचतान के कारण गृह विभाग की फाइलें देरी का शिकार हो रही हैं।
अगर सरकार नगर निगम क्षेत्र में कमिश्नरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी पुलिसिंग व्यवस्था (देहात सिस्टम) रखती है, तो इससे खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग एसपी, एएसपी, कार्यालय और पुलिस लाइन बनाने में लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा। एक ही जिले में दो तरह की व्यवस्थाएं प्रशासनिक जटिलताएं भी पैदा करेंगी।
यदि केवल शहर में कमिश्नरी लागू हुई, तो विधानसभा जैसे थानों के पास स्थित सेमरिया और नरदहा जैसे गांव खरोरा या सिलतरा थानों के अधीन चले जाएंगे। इससे ग्रामीणों को अपनी शिकायतों के लिए 1 किलोमीटर के बजाय 35 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। शिक्षा केंद्रों और कॉलेजों वाले इन इलाकों के लिए यह भौगोलिक दूरी एक बड़ी मुसीबत बन सकती है।
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