Jai Mundra : भारतीय क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव और खिलाड़ियों के वैश्विक प्रसार का एक और अद्भुत उदाहरण सामने आया है। राजस्थान के टोंक जिले के रहने वाले 29 वर्षीय बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा अब आयरलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गए हैं। 26 जून से भारत और आयरलैंड के बीच शुरू होने वाली टी20 सीरीज में जय का खेलना लगभग तय माना जा रहा है। एक भारतीय खिलाड़ी का दूसरे देश की टीम से अपने ही देश के खिलाफ खेलना किसी फिल्मी कहानी जैसा है। जय का आयरिश टीम में चयन न केवल उनके लिए, बल्कि उनके परिवार के लिए भी एक गौरवपूर्ण क्षण है। उनकी बहन मानसी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके भाई ने बचपन के अपने क्रिकेट के सपने को आखिरकार हकीकत में बदल दिया है।

शिक्षा के लिए गए और क्रिकेट में बनाई पहचान
यह सवाल स्वाभाविक है कि राजस्थान का एक युवा खिलाड़ी आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम तक कैसे पहुँचा? जय मूंदड़ा की कहानी दृढ़ संकल्प की है। वर्ष 2021 में जय अपनी एम.टेक (M.Tech) की उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए आयरलैंड गए थे। वहां पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने क्रिकेट के प्रति अपना जुनून बरकरार रखा। आयरलैंड में रहते हुए उन्होंने वहां की स्थानीय क्रिकेट परिस्थितियों को समझा और अपनी गेंदबाजी को निखारा। कड़ी मेहनत और वहां के नियमों के अनुसार 2025 में उन्हें आयरलैंड की नागरिकता प्राप्त हुई। उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया, जो किसी भी प्रवासी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
जय मूंदड़ा का क्रिकेटिंग करियर तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने आयरलैंड की प्रमुख घरेलू टीम ‘लेनस्टर’ (Leinster) के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। अगस्त 2024 में उन्होंने टी20 डेब्यू किया, जिसके बाद मई 2025 में लिस्ट-ए और मई 2026 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा। अब तक के अपने छोटे से लेकिन प्रभावशाली करियर में उन्होंने 1 फर्स्ट क्लास, 6 लिस्ट-ए और 5 टी20 मैच खेले हैं। उन्होंने अपनी गेंदबाजी के दम पर लिस्ट-ए में 11 विकेट और टी20 फॉर्मेट में 10 विकेट चटकाए हैं। इसके अलावा, बल्लेबाजी में भी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है, जहां अपने एकमात्र फर्स्ट क्लास मुकाबले में उन्होंने 50 रनों की जुझारू पारी खेली थी।
भारतीय मूल के खिलाड़ियों का वैश्विक प्रभाव
जय मूंदड़ा का मामला कोई अकेला उदाहरण नहीं है। हाल ही में निखिल चौधरी जैसे भारतीय खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बनाई है। यह दर्शाता है कि भारतीय क्रिकेट का ‘ग्रासरूट’ स्तर कितना मजबूत है कि यहां के खिलाड़ी दुनिया भर की कठिन परिस्थितियों में भी खुद को ढालकर शीर्ष स्तर पर खेल रहे हैं। टोंक के एक छोटे से कस्बे से निकलकर आयरलैंड की नीली जर्सी तक पहुंचने का जय का सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना नाम बनाना चाहते हैं। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि भारत के खिलाफ इस हाई-प्रोफाइल सीरीज में जय का प्रदर्शन कैसा रहता है।










