Rajkot Crime
Rajkot Crime : गुजरात के राजकोट जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक अत्यंत जघन्य अपराध सामने आया है, जहां छह साल की एक मासूम बच्ची को वहशी दरिंदगी का शिकार बनाया गया है। यह अमानवीय कृत्य राजकोट के आथकोट गांव में घटा, जिसकी क्रूरता की तुलना ‘निर्भया कांड’ जैसी वीभत्स घटनाओं से की जा रही है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, यह बच्ची एक मजदूर परिवार से संबंधित है और घटना के वक्त वह अपने घर के पास ही खेतों में खेल रही थी। इसी दौरान, आरोपी उसे बहला-फुसलाकर या जबरन एक सुनसान इलाके में ले गया, और वहां उसने मासूम के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। इस घटना ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है और अपराध की गंभीरता ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।
पुलिस जांच में जो चौंकाने वाले विवरण सामने आए हैं, वे आरोपी की क्रूर मानसिकता को दर्शाते हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी ने सबसे पहले बच्ची का गला घोंटकर उसका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। जब बच्ची दर्द और डर के मारे चीख-पुकार मचाने लगी, तो गुस्से और हताशा में आए दरिंदे ने और भी भयावह कदम उठाया। उसने बच्ची को चुप कराने और गंभीर रूप से चोट पहुंचाने के इरादे से उसके गुप्त अंग में एक रॉड जैसा हथियार डाल दिया। यह हमला इतना बर्बर था कि बच्ची बुरी तरह से जख्मी हो गई और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण अर्ध-बेहोशी की हालत में पहुंच गई। आरोपी, बच्ची को उसी दर्दनाक और असहाय अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गया, मानवाधिकारों और नैतिकता के सभी सिद्धांतों को तार-तार कर दिया।
जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो उसके परेशान परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। थोड़ी देर बाद, उन्होंने बच्ची को पास ही के सुनसान इलाके में खून से लथपथ और बेसुध अवस्था में पाया। अपनी मासूम बेटी की ऐसी भयानक हालत देखकर परिवार गहरे सदमे और दुख में डूब गया। बिना समय गंवाए, परिवार ने उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। बच्ची की नाजुक और गंभीर हालत को देखते हुए, डॉक्टरों ने उसे तुरंत राजकोट के सरकारी बच्चों के अस्पताल (सिविल अस्पताल) में स्थानांतरित कर दिया। बच्ची को बचाने और उसे गंभीर चोटों से उबारने के लिए डॉक्टरों की टीम लगातार उसका इलाज कर रही है। इस समय वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है, और पूरा देश उसके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।
मामले की अत्यधिक गंभीरता को देखते हुए, राजकोट पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमों का गठन किया और युद्ध स्तर पर जांच अभियान शुरू किया। पुलिस ने गहन छानबीन करते हुए आसपास के लगभग 100 लोगों से पूछताछ की। इसके अलावा, नजदीकी गांवों के सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से खंगाला गया और क्षेत्र के मोबाइल डेटा की भी जांच की गई। आरोपी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए, पुलिस ने विशेषज्ञों की मदद से बच्ची को आरोपी को पहचानने के लिए कहा, जिसमें उसने सफलता हासिल की। लंबी और पूरी तलाशी के बाद, पुलिस ने अंततः आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान रामसिंह तेरसिंग के रूप में हुई है, जो मध्य प्रदेश के अलीराजपुर का रहने वाला है और उसकी उम्र लगभग 35 साल है।
गिरफ्तार आरोपी रामसिंह तेरसिंग के बारे में बताया जा रहा है कि वह तीन बेटियों का पिता है। यह तथ्य इस जघन्य अपराध की विडंबना को और भी गहरा कर देता है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की पूछताछ में रामसिंह ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। राजकोट पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 65(2) और बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण हेतु बने कड़े कानून पोक्सो एक्ट (POCSO Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से आरोपी को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में ऐसे घिनौने अपराधों को रोका जा सके।
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