Shashi Tharoor:
Shashi Tharoor: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर को हाल ही में ‘वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवार्ड 2025’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा ने तत्काल ही सियासी हलकों में हलचल मचा दी, क्योंकि कांग्रेस पार्टी वैचारिक रूप से वीर सावरकर के प्रति आलोचनात्मक रुख रखती है। यह माना जा रहा था कि इस पुरस्कार को स्वीकार करने का थरूर का संभावित फैसला एक बार फिर उन्हें पार्टी के भीतर विरोध और तनाव की स्थिति में ला सकता है। अतीत में भी थरूर अपने कुछ बयानों और कार्यों को लेकर पार्टी के एक वर्ग की आलोचना का सामना कर चुके हैं। इसलिए, जैसे ही यह खबर सामने आई, राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कांग्रेस पार्टी और थरूर के बीच एक और संभावित ‘तनातनी’ की आशंका व्यक्त करना शुरू कर दिया था, जिसने पूरे घटनाक्रम को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला दिया।
तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए, शशि थरूर ने इस पुरस्कार को लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अपने इस निर्णय के पीछे स्पष्टीकरण दिया कि उन्हें इस पुरस्कार के आयोजक संस्था, एचआरडीएस इंडिया (HRDS India) के बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि यह पुरस्कार उन्हें उनकी सहमति के बिना ही घोषित किया जा रहा था। इस तरह, थरूर ने अपनी अनभिज्ञता और असहमति को सामने रखकर, खुद को संभावित राजनीतिक विवाद से दूर कर लिया। यह कदम न केवल पार्टी के भीतर की स्थिति को शांत करने वाला था, बल्कि इसने यह भी दर्शाया कि थरूर ऐसे सम्मान को स्वीकार करने से पहले पारदर्शिता और आयोजकों की प्रामाणिकता को महत्व देते हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए, शशि थरूर ने अपने रुख को और स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि उन्हें इस पुरस्कार की घोषणा के बारे में मंगलवार को ही मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली। जब पत्रकारों ने उनसे इस पुरस्कार समारोह में शामिल होने के बारे में पूछा, तो उनका जवाब सीधा और स्पष्ट था: “मुझे इसके बारे में कल ही पता चला। मैं नहीं जा रहा हूँ।”
थरूर ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि यह पुरस्कार कौन दे रहा है और इसकी पृष्ठभूमि क्या है। उन्होंने कहा, “मुझे पुरस्कार से संबंधित किसी भी बात की जानकारी नहीं है। मुझे पता लगाना होगा कि यह क्या है।” उनका यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि यह पूरा घटनाक्रम उनकी जानकारी या सहमति के बिना हुआ, जिसने कांग्रेस पार्टी के नेताओं को उनके प्रति संभावित नाराजगी व्यक्त करने से रोक दिया।
थरूर के इनकार करने से पहले, कांग्रेस पार्टी के भीतर से उनके खिलाफ कड़ा रुख सामने आया था। कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि शशि थरूर समेत पार्टी के किसी भी सदस्य को वीर सावरकर के नाम पर कोई पुरस्कार स्वीकार नहीं करना चाहिए। मुरलीधरन ने अपने विरोध का आधार बताते हुए कहा कि सावरकर ने “अंग्रेजों के सामने सिर झुकाया था।”
मुरलीधरन ने यह भी कहा कि अगर थरूर यह पुरस्कार स्वीकार करते, तो यह “कांग्रेस का अपमान और शर्मिंदगी की बात” होती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि थरूर ऐसा नहीं करेंगे। हालांकि, थरूर के तुरंत इनकार करने के बाद, मुरलीधरन की चेतावनी और थरूर के फैसले ने एक-दूसरे के पूरक का काम किया और पार्टी के भीतर उत्पन्न होने वाले एक बड़े विवाद को जड़ से खत्म कर दिया। इस घटना ने यह सुनिश्चित किया कि कांग्रेस पार्टी वैचारिक रूप से एकमत बनी रहे।
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