Rajkot Earthquake
Rajkot Earthquake: पूर्वोत्तर राज्यों में आए भूकंप के बाद अब पश्चिम भारत के गुजरात में भी कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। गुजरात के राजकोट जिले में पिछले 24 घंटों के भीतर बार-बार आए भूकंप के झटकों ने स्थानीय निवासियों को बुरी तरह डरा दिया है। विशेष रूप से उपलेटा और धोराजी इलाकों में धरती के कांपने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार सुबह जब लोग गहरी नींद में थे, तभी रिक्टर स्केल पर 3.8 तीव्रता के तेज झटके ने सबकी नींद उड़ा दी। घबराहट के मारे लोग अपने मासूम बच्चों और बुजुर्गों के साथ खुले मैदानों और सड़कों की ओर भागे। डर इस कदर हावी है कि लोग अब अपने घरों के अंदर जाने से कतरा रहे हैं।
भूकंप की बारंबारता को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने बेहद सतर्कता बरतते हुए राजकोट के प्रभावित इलाकों में स्कूलों को तुरंत बंद करने का आदेश जारी किया है। आंकड़ों के मुताबिक, महज 12 घंटे के भीतर चार बार स्पष्ट झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता 2.7 से 3.8 के बीच दर्ज की गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले 24 घंटों में कुल सात बार कंपन महसूस किया गया है। यद्यपि अब तक किसी भी प्रकार के जान-माल के बड़े नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन पुरानी इमारतों में दरारें आने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।
सिस्मोलॉजी सेंटर (भूकंप विज्ञान केंद्र) की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार सुबह आए सबसे शक्तिशाली झटके का केंद्र उपलेटा से लगभग 28 किलोमीटर दूर जमीन के नीचे दर्ज किया गया। भूकंप का यह सिलसिला वास्तव में गुरुवार रात से ही शुरू हो गया था। पहला बड़ा झटका गुरुवार रात 8:44 बजे महसूस किया गया जिसकी तीव्रता 3.3 थी। इसके बाद रात भर रुक-रुक कर छोटे झटके आते रहे। शुक्रवार की सुबह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सुबह 6:19 बजे और फिर 6:58 बजे लगातार दो बार 3.8 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। बार-बार आने वाले ये ‘आफ्टरशॉक्स’ किसी बड़ी अनहोनी की ओर संकेत कर रहे हैं, जिससे वैज्ञानिक भी सतर्क हैं।
राजकोट में भूकंप की यह घटनाएं एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रही हैं, जब पूरा राज्य ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के स्वागत की तैयारी कर रहा है। गुजरात सरकार ने एक दिन पहले ही इस भव्य पर्व की शुरुआत की है। इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को गुजरात पहुंचने वाले हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पीएम मोदी सबसे पहले सोमनाथ मंदिर में दर्शन करेंगे और उसके बाद राजकोट का दौरा करेंगे। भूकंप के इन झटकों ने प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आयोजन स्थलों की सुरक्षा जांच फिर से की जा रही है।
राजकोट और सौराष्ट्र का क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि जमीन के नीचे टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल के कारण ये छोटे-छोटे झटके आ रहे हैं। हालांकि 3.8 की तीव्रता को बहुत विनाशकारी नहीं माना जाता, लेकिन 24 घंटे में सात बार झटके आना इस बात का संकेत है कि फाल्ट लाइन में ऊर्जा का उत्सर्जन हो रहा है। विशेषज्ञों की एक टीम राजकोट के उपलेटा क्षेत्र में भेजी जा रही है ताकि इन झटकों के पैटर्न का बारीकी से अध्ययन किया जा सके। आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF) को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
भूकंप की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि झटके महसूस होने पर लिफ्ट का प्रयोग न करें, बिजली के खंभों और ऊंची इमारतों से दूर रहें और यदि घर के भीतर हों तो मजबूत मेज के नीचे शरण लें। राजकोट कलेक्टर कार्यालय लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। पीएम मोदी के आगामी दौरे और भूकंप की आशंका के बीच प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। फिलहाल राजकोट के लोग कुदरत के शांत होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
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