Rajya Sabha Election
Rajya Sabha Election 2026: कांग्रेस पार्टी ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए गुरुवार को अपने 6 महत्वपूर्ण उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस सूची में सबसे प्रमुख और प्रभावशाली नाम वरिष्ठ अधिवक्ता और पार्टी के कद्दावर नेता अभिषेक मनु सिंघवी का है। पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर उन्हें तेलंगाना से चुनावी मैदान में उतारा है। सिंघवी वर्तमान में भी इसी राज्य से राज्यसभा के सदस्य हैं और उनके अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें पुनः मौका दिया है। तेलंगाना की दो सीटों पर हो रहे इस चुनाव में कांग्रेस ने दूसरी सीट के लिए मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले वी. नरेंद्र रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है।
कांग्रेस ने अपनी इस सूची में विभिन्न राज्यों के समीकरणों को साधने की कोशिश की है। छत्तीसगढ़ से फूलो देवी नेताम को दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है, जो वर्तमान में भी सदन का हिस्सा हैं। हिमाचल प्रदेश की बात करें तो वहां से कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुराग शर्मा को मौका दिया गया है, जो जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती के लिए जाने जाते हैं। हरियाणा से पार्टी ने कर्मवीर सिंह बौद्ध पर दांव खेला है, जबकि दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक को उम्मीदवार घोषित किया गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने इन नियुक्तियों के जरिए आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए अपनी तैयारी स्पष्ट कर दी है।
आज बिहार की राजनीति के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। रिकॉर्ड 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके नीतीश कुमार आज राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। सुबह 11:30 बजे वे बिहार विधानसभा पहुंचकर अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे। उनके साथ जदयू (JDU) के वरिष्ठ नेता रामनाथ ठाकुर भी उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करेंगे। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी पटना पहुंचने की संभावना है। नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में जाना बिहार एनडीए के भीतर एक बड़े शक्ति संतुलन के बदलाव का संकेत है।
नीतीश कुमार के दिल्ली प्रस्थान और मुख्यमंत्री पद से संभावित इस्तीफे की खबरों के बीच बिहार में नए नेतृत्व को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिहार के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को पटना में हुई जदयू विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक में यह तय हो चुका है कि नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही, इस बैठक में नीतीश कुमार के बेटे की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं, जिससे राज्य में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत मानी जा रही है।
राज्यसभा चुनाव की इन घोषणाओं और नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के फैसले से राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल सकती है। जहाँ कांग्रेस अपने अनुभवी कानूनी और रणनीतिक चेहरों को सदन में बनाए रखना चाहती है, वहीं बिहार में सत्ता का केंद्र बदलने से एनडीए गठबंधन के भीतर भाजपा का कद और बढ़ेगा। नीतीश कुमार की केंद्र में सक्रियता न केवल बिहार के विकास बल्कि विपक्षी एकता और राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के रुख को भी प्रभावित करेगी। आने वाले दिनों में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा इस पूरी प्रक्रिया का सबसे रोचक हिस्सा होगी।
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