Rajya Sabha Election 2026
Rajya Sabha Election 2026 : भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में अगले महीने एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिलने वाला है. देश के विभिन्न राज्यों से खाली हो रही राज्यसभा की 22 सीटों पर चुनाव की तारीखों का बिगुल जल्द ही बजने वाला है. इस चुनावी समर में देश के कई दिग्गज और कद्दावर नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. सेवानिवृत्त होने वाले प्रमुख चेहरों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ-साथ मोदी कैबिनेट के दो महत्वपूर्ण सहयोगी—केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू शामिल हैं. भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) इन खाली हो रही सीटों पर मतदान और नामांकन प्रक्रिया के लिए बहुत जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है.
आगामी राज्यसभा चुनाव के भौगोलिक समीकरणों पर नजर डालें तो कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात से सबसे ज्यादा चार-चार सीटें खाली होने जा रही हैं. इनके अलावा हिंदी बेल्ट के दो महत्वपूर्ण राज्यों, राजस्थान और मध्य प्रदेश से तीन-तीन सीटें खाली हो रही हैं. पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों की बात करें तो मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड से एक-एक सीट पर सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है. मुख्य चुनाव के समानांतर ही झारखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र की एक-एक सीट पर उपचुनाव भी कराए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जिससे राज्यों की राजनीतिक सरगर्मियां और अधिक बढ़ गई हैं.
रिटायर होने वाले इन 22 सांसदों के दलीय वर्गीकरण को देखें तो इसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 11 सांसद शामिल हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के चार सदस्य इस सूची में हैं. बाकी सीटें क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के खाते की हैं, जिनमें वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के तीन और जेडीएस (JDS), टीडीपी (TDP) व एनपीपी (NPP) के एक-एक सांसद का नाम शामिल है. इस चुनाव में दो केंद्रीय मंत्रियों का राजनीतिक भविष्य भी दांव पर लगा हुआ है.
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, जो फिलहाल राजस्थान से उच्च सदन के सदस्य हैं, उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. इसी प्रकार, अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन, जो मध्य प्रदेश से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उनका कार्यकाल भी 21 जून को ही खत्म होने जा रहा है.
इन दोनों केंद्रीय मंत्रियों को दोबारा सदन में भेजने को लेकर भाजपा के भीतर मंथन का दौर जारी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के आगामी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा राज्यसभा का टिकट थमा सकती है. दूसरी ओर, जॉर्ज कूरियन को केरल में पार्टी के विस्तार और सामाजिक संतुलन के मद्देनजर केंद्र सरकार में शामिल किया गया था.
अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बीजेपी उन्हें मध्य प्रदेश या किसी अन्य राज्य से दोबारा प्रत्याशी बनाती है या नहीं. केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इन दोनों मंत्रियों की कुर्सी का सलामत रहना पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि वे अगले छह महीनों के भीतर संसद के किसी भी सदन (इस मामले में राज्यसभा) के सदस्य के रूप में दोबारा निर्वाचित होकर आते हैं या नहीं.
दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में मौजूदा संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस पार्टी को चार में से तीन सीटें आसानी से मिलती दिख रही हैं. इन तीन सीटों में से एक पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का दोबारा चुना जाना पूरी तरह तय माना जा रहा है. इसके विपरीत, मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के लिए डगर काफी कठिन है. राज्य में कांग्रेस को अपनी एकमात्र सीट बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा, क्योंकि उसके पास तय कोटे से केवल छह सरप्लस (अतिरिक्त) वोट ही उपलब्ध हैं.
ऐसी स्थिति में पार्टी किसी बेहद अनुभवी और वरिष्ठ नेता पर ही दांव खेलेगी. हालांकि, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने खुद को फिर से राज्यसभा जाने की रेस से पूरी तरह बाहर कर लिया है. इस राज्य की तीन सीटों में से दो बीजेपी और एक कांग्रेस के खाते में जाने की उम्मीद है, जहां बीजेपी की ओर से जॉर्ज कूरियन भी दावेदार हैं.
राजस्थान की तीन सीटों के समीकरण के अनुसार, सत्ताधारी बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है. यहां बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का नाम सबसे आगे चल रहा है, जबकि कांग्रेस के खेमे से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के नामों की चर्चा जोरों पर है. वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी को सबसे बड़ा और ऐतिहासिक झटका गुजरात राज्य में लगने जा रहा है. वर्तमान में गुजरात की कुल 11 राज्यसभा सीटों में से कांग्रेस के पास महज एक सीट है, जिस पर शक्ति सिंह गोहिल (जो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं) काबिज हैं.
वे भी 21 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. गुजरात में आज की तारीख में एक सीट जीतने के लिए न्यूनतम 46 विधायकों के मतों की आवश्यकता है, जबकि कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक ही शेष हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि कांग्रेस गुजरात से अपना कोई भी उम्मीदवार नहीं जिता सकती. संसदीय इतिहास में यह पहली बार होगा जब गुजरात जैसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य से राज्यसभा में कांग्रेस का एक भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं होगा.
गुजरात की निराशा के बीच कांग्रेस पार्टी को झारखंड से कुछ उम्मीद की किरण नजर आ रही है. झारखंड में कांग्रेस की पूरी चुनावी रणनीति और आस उसकी सहयोगी और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के रुख पर टिकी हुई है. कांग्रेस को यह पूरी उम्मीद है कि गठबंधन धर्म निभाते हुए जेएमएम अपनी यह सीट उसके खाते में ट्रांसफर कर देगी. यदि संपूर्ण रूप से इस राज्यसभा चुनाव के बाद देश के राजनीतिक परिदृश्य और उच्च सदन की दलीय स्थिति का आकलन किया जाए, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रहने की संभावना है.
हालांकि, आंध्र प्रदेश के राजनीतिक हालातों को देखते हुए चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी (TDP) की सीटों की संख्या में इजाफा होना लगभग तय है. वर्तमान समय में राज्यसभा में अकेले बीजेपी के 113 सांसद हैं, जबकि पूरे एनडीए कुनबे के पास 148 सांसदों का मजबूत बहुमत है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जून के इस दौर के चुनाव संपन्न हो जाने के बाद भी सदन में भारतीय जनता पार्टी का संख्या बल कमोबेश इसी के आसपास स्थिर रहेगा और उसकी बादशाहत कायम रहेगी.
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