Amethi Shankaracharya Yatra
Amethi Shankaracharya Yatra: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी राष्ट्रव्यापी ‘गौ रक्षा यात्रा’ के सिलसिले में गुरुवार को उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में पहुंचे. अमेठी की सीमा में प्रवेश करते ही स्थानीय श्रद्धालुओं, सनातनी भक्तों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनका अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया. जिले के प्रमुख चौक-चौराहों पर सुबह से ही हजारों की संख्या में लोग एकत्र थे, जिन्होंने शंखध्वनि और पुष्प-वर्षा के साथ शंकराचार्य का जोरदार अभिनंदन किया. यह जागृति यात्रा कस्बे के विभिन्न मुख्य मार्गों और रिहायशी इलाकों से गुजरते हुए गौरीगंज की ओर आगे बढ़ी. इस पूरे सफर के दौरान जगह-जगह पर आम जनता और महिलाओं ने आरती उतारकर शंकराचार्य का भव्य स्वागत किया और उनके चरण स्पर्श कर आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त किया.
अमेठी के मुख्य पड़ाव पर एकत्रित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उपस्थित सभी लोगों को पूरी निष्ठा के साथ गौ रक्षा और गौ संवर्धन का सामूहिक संकल्प दिलाया. उन्होंने अपने उद्बोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि गाय केवल एक पशु नहीं है, बल्कि वह संपूर्ण भारतीय संस्कृति, दर्शन और सनातन धर्म का मुख्य प्राण और आधार स्तंभ है.
उन्होंने कहा कि गौ माता के सम्मान और उनके जीवन की रक्षा करना प्रत्येक सनातनी का परम और अनिवार्य कर्तव्य है. उन्होंने समाज के सभी वर्गों से पुरजोर अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब पूरे हिंदू समाज को एकजुट होकर देश में हो रही अवैध गौ हत्या और गौ तस्करी के क्रूर नेटवर्क के खिलाफ पूरी ताकत से आवाज उठानी होगी.
अमेठी में मीडियाकर्मियों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने अपनी इस यात्रा की पृष्ठभूमि की विस्तृत जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि गौ माता की प्रतिष्ठा बहाल करने के उद्देश्य से शुरू हुई यह पावन यात्रा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से प्रारंभ हुई है. यात्रा का एकमात्र और मुख्य उद्देश्य देश भर में गौ माता के प्राणों की रक्षा करना और समाज में व्यापक जनजागरण फैलाना है.
उन्होंने कहा कि वह उत्तर प्रदेश की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का सघन दौरा कर रहे हैं ताकि जमीनी स्तर पर लोगों को गौ संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके. अब तक वे राज्य के लगभग 80 से 90 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि वे जिस भी क्षेत्र में जा रहे हैं, वहां की जनता गौवंश की दयनीय स्थिति को लेकर बेहद दुखी और चिंतित है, क्योंकि वर्तमान में गायों की हालत लगातार बदतर होती जा रही है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी प्रशासनिक नीतियों पर सीधा निशाना साधते हुए शंकराचार्य ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया. उन्होंने कहा कि केवल कैमरों के सामने आकर गाय को गुड़-रोटी खिला देने या कागजों पर बड़ी-बड़ी गौशालाएं संचालित करने से कोई भी व्यक्ति या शासक वास्तविक अर्थों में सच्चा गौ भक्त साबित नहीं हो जाता. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में स्वयं को गौ भक्त मानती है, तो उसे तत्काल प्रभाव से गाय को कानूनी तौर पर पशु की सामान्य श्रेणी से बाहर निकालना चाहिए और उसे “गौ माता” के रूप में आधिकारिक दर्जा देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास निर्णय लेने की अपार संवैधानिक शक्तियां हैं, लेकिन आज के दौर में भी शासन-प्रशासन को गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने में एक अजीब सी हिचक दिखाई देती है. जब कोई अपनी माता को माता कहने में संकोच करे, तो उससे गौ रक्षा की क्या उम्मीद की जाए.
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जा रही सरकारी गौशालाओं के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए उनकी वर्तमान कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से हर साल करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट जारी करने के खोखले दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट और बेहद दर्दनाक है. उन्होंने कहा कि अधिकांश गौशालाओं में बेजुबान गायों को पेट भर पर्याप्त चारा, पीने का साफ पानी और आवश्यक दवाइयां तक नसीब नहीं हो रही हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करने पर पता चलता है कि आज भी हजारों गायें सड़कों पर लावारिस और बेसहारा घूमने को मजबूर हैं, जहां कई स्थानों पर आवारा कुत्तों द्वारा जीवित गायों को नोच-नोच कर मार डालने की रूह कंपा देने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यदि मीडिया इन गौशालाओं की वास्तविक रिपोर्टिंग करना चाहे, तो वहां ताले लगा दिए जाते हैं या पत्रकारों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी जाती है.
अपने वक्तव्य के समापन में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बड़ा राजनीतिक व सामाजिक संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अब देश और प्रदेश की जागरूक जनता केवल बिजली, सड़क, पानी और बुनियादी विकास जैसे पारंपरिक चुनावी मुद्दों तक सीमित रहने वाली नहीं है, बल्कि अब गौ माता की रक्षा और उनका सम्मान भी देश का एक बहुत बड़ा राजनीतिक और चुनावी मुद्दा बन चुका है.
उन्होंने दृढ़ता से दावा किया कि आगामी समय में एक बहुत बड़ा जनसमूह गौ संरक्षण के नाम पर वर्तमान सरकार से हिसाब और जवाब मांगने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि जब यह वर्तमान सरकार भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई थी, तब देश के करोड़ों सनातनियों को यह दृढ़ उम्मीद थी कि गौ रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन आज के मौजूदा बदतर हालात को देखकर हर सच्चा हिंदू खुद को बेहद ठगा हुआ और निराश महसूस कर रहा है. उनकी यह यात्रा इसी निराशा को दूर कर समाज को एकजुट करने का एक पवित्र प्रयास है.
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