Ram Mandir CEO : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक और प्रबंधकीय ढांचे को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से अब ‘मुख्य कार्यकारी अधिकारी’ (CEO) की नियुक्ति की कवायद तेज कर दी गई है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए, चयन के लिए गठित विशेष समिति ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें पद के लिए आवश्यक पात्रता मानदंडों को अंतिम रूप दिया गया। मंदिर में चढ़ावे और दान संबंधी प्रबंधन में हालिया चुनौतियों को देखते हुए, ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने का साहसिक निर्णय लिया है। यह समिति अब मंदिर के संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक कुशल नेतृत्व की तलाश में है।

सीईओ पद के लिए पात्रता और चयन की विस्तृत प्रक्रिया
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा तय किए गए मानदंडों के अनुसार, सीईओ पद के लिए उम्मीदवार का स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, प्रशासन या वित्त (Finance) के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाले पेशेवरों को ही इस पद के योग्य माना जाएगा। मंदिर प्रबंधन के क्षेत्र में पूर्व अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उम्मीदवार का सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म का अनुयायी होना आवश्यक है। आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ई-मेल का सहारा लिया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही एक समर्पित ई-मेल आईडी जारी की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवार 18 जुलाई तक अपने आवेदन जमा कर सकते हैं।

तीन सदस्यीय समिति संभालेगी चयन की पूरी जिम्मेदारी
इस महत्वपूर्ण नियुक्ति को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन किया गया है। इस प्रतिष्ठित समिति में पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावरे, सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल हैं। समिति का लक्ष्य अगले एक महीने के भीतर चयन प्रक्रिया को पूरी तरह संपन्न करना है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक सहयोग के लिए एक सचिव की भी नियुक्ति की गई है। चयनित सीईओ का कार्यकाल प्रारंभिक तौर पर तीन वर्षों का होगा और उन्हें अपनी सेवाएं देने के लिए अयोध्या में ही निवास करना अनिवार्य होगा।
प्रशासनिक सुधार और प्रबंधन की मजबूती का संकल्प
राम मंदिर में हाल ही में सामने आए दान चोरी के मामलों ने ट्रस्ट को सख्त प्रशासनिक सुधारों के लिए प्रेरित किया है। मंदिर की बढ़ती भव्यता और तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, एक अनुभवी सीईओ की नियुक्ति न केवल सुरक्षा बल्कि आर्थिक प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम है। ट्रस्ट का मानना है कि पेशेवर नेतृत्व आने से मंदिर की व्यवस्थाएं और अधिक व्यवस्थित होंगी, जिससे आने वाले लाखों भक्तों को बेहतर अनुभव मिल सकेगा। अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ-साथ अब उसकी कार्यप्रणाली में आधुनिकता और पारदर्शिता का समावेश करना ही ट्रस्ट का मुख्य लक्ष्य है। समिति इस नियुक्ति के जरिए मंदिर प्रशासन को एक नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।











