Ram Mandir में चढ़ावे की चोरी के मामले ने पूरे देश को चौंका दिया है, जहां पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन क्या यह केवल साधारण चोरी थी या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, इसकी जांच अभी जारी है…
Ram Mandir में चढ़ावे की चोरी के मामले ने पूरे देश को चौंका दिया है, जहां पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन क्या यह केवल साधारण चोरी थी या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, इसकी जांच अभी जारी है…

Ram Mandir Case : अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्र और चढ़ावे की राशि में हुई कथित चोरी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण में नामजद किए गए सभी 8 आरोपियों को पुलिस ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार को मामला दर्ज होने के तुरंत बाद इन सभी को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद पूरी रात उनसे पूछताछ की गई। अब विशेष जांच दल (SIT) के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए आरोपियों को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर की गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कुल 8 लोगों को नामजद किया गया है। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष यादव शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इनमें से अधिकांश आरोपी मंदिर में दान राशि की गिनती और उसके प्रबंधन की प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं संज्ञान लिया और उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के आदेश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस SIT में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जांच निष्पक्ष होगी और ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होकर रहेगा। उन्होंने दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, इस पर अपना सख्त रुख स्पष्ट कर दिया है।
जांच के घेरे में आए आरोपियों में से एक, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का निजी वाहन चालक बताया जाता है। हालांकि, टिन्नू ने मीडिया के सामने अपनी संलिप्तता से इनकार करते हुए दावा किया कि उसके खिलाफ साजिश रची गई है। वहीं, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा भी दान राशि की गिनती में सक्रिय भूमिका निभाते थे। SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कठोर सिफारिशें की हैं, जिससे पता चलता है कि जांच एजेंसी इस मामले की तह तक जाकर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। अयोध्या प्रशासन और पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम के हर पहलू की सघन जांच कर रहे हैं।
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