Ram Mandir Donation Case : अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मांग की कि मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन से जुड़ी पूरी व्यवस्था का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और जिन लोगों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जयराम रमेश ने फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि पूरी व्यवस्था का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। उन्होंने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और जांच में पारदर्शिता की मांग की। रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन की जिम्मेदारी जिन लोगों से जुड़ी रही है, उन्हें इस मामले में जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
जांच में सामने आईं 105 घटनाएं
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी SIT की रिपोर्ट में चढ़ावे की रकम से जुड़े कथित अनधिकृत लेनदेन या नकदी हटाने की 105 घटनाओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ये घटनाएं मंदिर परिसर में दान की रकम गिनने वाले स्थान से संबंधित CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच के दौरान सामने आईं। जांच में कथित तौर पर कई लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की गई है।
25 सितंबर तक दाखिल हो सकती है चार्जशीट
राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच में चार्जशीट को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि SIT 25 सितंबर तक पहली चार्जशीट दाखिल करने की स्थिति में है। पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है, इसलिए जांच एजेंसी के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल करना महत्वपूर्ण है।
‘बड़ी मछलियों’ पर कार्रवाई का सवाल
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि मामले में अब तक कथित तौर पर बड़ी भूमिका वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने जांच की दिशा को लेकर भी सवाल किए और पूछा कि मामले में मुख्य जिम्मेदार लोगों तक जांच कब पहुंचेगी। हालांकि ये कांग्रेस नेता की राजनीतिक टिप्पणियां हैं, जबकि वास्तविक आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होना है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष SIT की स्थिति रिपोर्ट भी रखी गई है। अदालत ने जांच को जल्द पूरा करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। जांच में CCTV फुटेज के अलावा गवाहों के बयान, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा, फोरेंसिक जांच और ऑडिट से जुड़ी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
कीमती दान की भी हुई जांच
SIT ने मंदिर को मिले कई कीमती दान की वस्तुओं की भी जांच की है। सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार 200 किलोग्राम और 38.288 किलोग्राम चांदी की ईंटों समेत अन्य कीमती वस्तुओं से जुड़े रिकॉर्ड और सामग्री का सत्यापन किया गया। रिपोर्ट में इन वस्तुओं के संबंध में सत्यापन के दौरान कोई विसंगति नहीं मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
ट्रस्ट की जवाबदेही पर भी कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस ने मंदिर ट्रस्ट की भूमिका और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने पूछा कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया क्या होगी। उन्होंने ट्रस्ट को भंग करने और जांच को सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ाने जैसे सवाल भी उठाए हैं। हालांकि इन मांगों पर अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
जांच के निष्कर्ष का इंतजार
राम मंदिर चढ़ावा मामले में फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और 25 सितंबर तक प्रस्तावित चार्जशीट पर नजर बनी हुई है। SIT की जांच में सामने आए CCTV फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की कानूनी स्थिति आगे स्पष्ट होगी। वहीं कांग्रेस इस मामले में अधिक पारदर्शिता और व्यापक ऑडिट की मांग कर रही है।
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