Ram Mandir Donation Row : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को अपनी कार्रवाई को मुकम्मल करने के लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय प्रदान किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है ताकि इस संवेदनशील मामले का कोई भी पहलू अनछुआ न रहे। एसआईटी वर्तमान में वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों के विवरण, तमाम कानूनी दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की बेहद बारीकी से गहन जांच कर रही है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि ट्रस्ट के धन का कहीं भी दुरुपयोग हुआ है, तो उस पूरी सच्चाई को जनता के सामने लाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

चंपत राय के समर्थन में एकजुट हुआ अयोध्या का संत मंडल
दूसरी ओर, इस विवादित माहौल में अयोध्या संत मंडल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के समर्थन में पूरी मजबूती से खड़ा हो गया है। शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में संतों ने साफ तौर पर कहा कि वे वर्षों से चंपत राय की कार्यप्रणाली को करीब से जानते हैं और उनकी ईमानदारी पर उन्हें कोई संदेह नहीं है। संतों का मानना है कि मीडिया के कुछ वर्गों में जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनके समर्थन में अब तक कोई भी ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। संत मंडल ने चंपत राय के धैर्य और संयम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठन की मांग की थी, जो उनकी पारदर्शिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गोविंद देव गिरी पर संतों के सवाल और जवाबदेही की मांग
संत मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एसआईटी गठित करने के निर्णय का स्वागत किया और दोहराया कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने ट्रस्ट के सदस्य गोविंद देव गिरी से तीखे सवाल पूछे हैं। संतों का कहना है कि यदि उन्हें ट्रस्ट के कार्यों या वित्तीय मामलों में कोई आपत्ति थी, तो उन्होंने इस विषय को आंतरिक मंच के बजाय सार्वजनिक क्यों किया? संतों ने गोविंद देव गिरी से इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण देने की मांग की है। वहीं, संतों ने चंपत राय को अपना पूर्ण आशीर्वाद और समर्थन देने की घोषणा करते हुए कहा कि वे इस कठिन समय में उनके साथ चट्टान की तरह खड़े हैं।
जेल में बंद पांच आरोपियों से पूछताछ की पुलिस को मिली अनुमति
जांच के सिलसिले में अयोध्या पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। अदालत ने पुलिस को जेल में बंद पांच आरोपियों—अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, राम शंकर यादव, करुणेश पांडेय और मनीष यादव—से गहन पूछताछ करने की अनुमति दे दी है। रविवार से जेल परिसर के भीतर ही यह पूछताछ प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पुलिस अधिकारी इन आरोपियों से दान राशि के संग्रह, संदिग्ध बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों के बारे में सवाल करेंगे। यदि इस पूछताछ में कोई नया सुराग मिलता है, तो पुलिस आरोपियों की कस्टडी की मांग भी कर सकती है, ताकि मामले की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
6 जुलाई की महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी सबकी निगाहें
इस बीच, 6 जुलाई को प्रस्तावित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। जांच के तेजी से आगे बढ़ने और एसआईटी को अतिरिक्त समय मिलने के बाद इस बैठक में मौजूदा विवाद और भविष्य की रणनीति पर मंथन होना निश्चित है। जांच एजेंसियां लगातार यह भरोसा दिला रही हैं कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ट्रस्ट के लिए यह बैठक अपनी विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करने और विवादों को विराम देने के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित हो सकती है।
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