Ram Mandir Theft Case : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी का मामला अब देश की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बन चुका है. इस विवाद ने उस वक्त एक नया मोड़ ले लिया जब अयोध्या के स्थानीय भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग कर दी.

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. भाजपा नेता का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था का केंद्र है, इसलिए मंदिर प्रशासन और चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद पर पूरी पारदर्शिता होना बेहद आवश्यक है. यदि आरोप झूठे हैं तो जांच से सच सामने आना चाहिए और यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

अखिलेश यादव का तीखा हमला: सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर चौतरफा हमला बोल दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इसे ‘चढ़ावा चोरी कांड’ करार देते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए. अखिलेश यादव ने पूछा कि देश की सनातन आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले इन तत्वों के पीछे आखिरकार कौन से रसूखदार लोग हैं और उन्हें किसका संरक्षण मिल रहा है? सपा प्रमुख ने मांग की कि यदि ट्रस्ट के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है,
तो मंदिर परिसर की सीसीटीवी फुटेज को तुरंत सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? इसके साथ ही उन्होंने चढ़ावे की गिनती जैसे बेहद संवेदनशील काम में ट्रस्ट और सरकारी बैंक के बीच निजी कंपनियों को शामिल करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई.
चंपत राय के स्पष्टीकरण पर पलटवार और सपा के पूर्व मंत्री का दावा
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब अयोध्या से सपा के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने 7 जून 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे से लगभग 5 से 7 करोड़ रुपये की भारी रकम गायब की गई है. उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को चुनौती दी कि यदि यह आरोप झूठे हैं तो वे प्रभु श्रीराम की कसम खाकर कहें या फिर इस मामले में तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कराएं.
इसके बाद चंपत राय ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और काल्पनिक बताया था. चंपत राय के इसी स्पष्टीकरण पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उनका ‘चेहरे का हाव-भाव और देह की भाषा हताशा से भरी थी’ और 40 सेकंड का यह कमजोर स्पष्टीकरण पूरे विश्व के सनातनी समाज को और अधिक शंकित तथा आहत करने वाला है.
राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती और ऑडिट की क्या है वर्तमान व्यवस्था?
इस पूरे विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों ने मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट किया है. वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती स्टेट बैंक के कर्मचारियों द्वारा ट्रस्ट के अधिकृत पदाधिकारियों की सीधी मौजूदगी में की जाती है. यह पूरी प्रक्रिया हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की लगातार निगरानी में पूरी होती है. गिनती के बाद दान की गई सटीक रकम को आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है और उसे परिसर के भीतर बने एक सुरक्षित लॉकर में रख दिया जाता है,
जिसे अगले ही दिन बैंक खाते में जमा करा दिया जाता है. ट्रस्ट का मुख्य वित्तीय खाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अयोध्या धाम शाखा में संचालित है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरे चढ़ावे के वित्तीय ऑडिट (Audit) की जिम्मेदारी देश की प्रतिष्ठित तकनीकी कंपनी टीसीएस (टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज) को सौंपी गई है, जो इसकी पूरी निगरानी करती है.
पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बयानों की तीखी जंग
इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है और दोनों पक्षों के नेताओं के बीच जमकर बयानबाजी हो रही है:
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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक: उन्होंने सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा कि अखिलेश यादव की सोच ‘बाबरवादी’ है और उन्होंने कभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान नहीं किया. वे केवल अफवाह फैलाकर झूठ गढ़ने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं.
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जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य: उन्होंने भी अखिलेश के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राम मंदिर में एक भी पैसे की चोरी नहीं हो रही है. जो लोग रामलला का रूप निहारने नहीं आते, वे केवल राजनीति के लिए ऐसे आरोप लगाते हैं.
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ओपी राजभर (कैबिनेट मंत्री): उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को यह भी नहीं पता कि राम मंदिर का दरवाजा किधर है, जब सरकार और खुफिया तंत्र को कुछ नहीं पता तो उनके पास कौन सा गुप्त सबूत आ गया?
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अवधेश प्रसाद (सपा सांसद, अयोध्या): उन्होंने विपक्ष के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम के मंदिर में करोड़ों रुपये की खुली लूट हुई है और इस हेराफेरी को अंजाम देने वाले लोगों को जनता अच्छी तरह पहचानती है.
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आचार्य प्रमोद कृष्णम: उन्होंने कहा कि राम मंदिर का हमेशा विरोध करने वाले और इसके निर्माण के रास्ते में रोड़े अटकाने वाले लोगों की बातों पर देश कभी यकीन नहीं कर सकता.
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