Ram Mandir Trust : अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हो गई। बैठक के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मीडिया को कई अहम निर्णयों की जानकारी दी। इस दौरान मंदिर के धार्मिक कार्यों के संचालन, नई धार्मिक समिति के गठन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं को और अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नई समिति का पुनर्गठन किया गया है।

धार्मिक कार्यों की जिम्मेदारी संतों को सौंपने का निर्णय
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि ने बताया कि मंदिर से जुड़े धार्मिक कार्यों की जिम्मेदारी अब प्रमुख रूप से अयोध्या के संतों को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट चाहता है कि राम मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों का संचालन स्थानीय परंपराओं और संतों के मार्गदर्शन में हो। इसी उद्देश्य से धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया है, ताकि मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाएं सुचारु और परंपरागत तरीके से संचालित हो सकें।

नई धार्मिक समिति में शामिल किए गए नौ सदस्य
गोविंद गिरि ने बताया कि नई धार्मिक समिति में कुल नौ सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें पांच सदस्य अयोध्या के प्रमुख संत हैं, जबकि चार सदस्य बाहरी क्षेत्रों से लिए गए हैं। ट्रस्ट का मानना है कि स्थानीय संतों के अनुभव और बाहरी विद्वानों के मार्गदर्शन से मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा। समिति मंदिर से जुड़े सभी धार्मिक कार्यक्रमों और परंपराओं पर आवश्यक निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अयोध्या के पांच संत निभाएंगे प्रमुख भूमिका
धार्मिक समिति में शामिल अयोध्या के संतों के नाम भी सार्वजनिक किए गए। इनमें मणिराम छावनी के महंत कमल नयन दास, रामकथा कुंज के स्वामी रामानंद दास, रमा वल्लभा कुंज के स्वामी राजकुमार दास, स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण तथा निर्मोही अखाड़े से जुड़े स्वामी दीनेंद्र दास शामिल हैं। ट्रस्ट के अनुसार, ये सभी संत मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पद्धति और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
बाहरी संत और धर्माचार्य भी समिति का हिस्सा
ट्रस्ट ने बताया कि धार्मिक समिति में अयोध्या के संतों के अलावा देश के प्रतिष्ठित धर्माचार्यों को भी स्थान दिया गया है। इनमें जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती और युगपुरुष परमानंद स्वामी सहित अन्य वरिष्ठ धार्मिक हस्तियां शामिल हैं। ट्रस्ट का उद्देश्य है कि विभिन्न परंपराओं और आध्यात्मिक अनुभवों का लाभ मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं में मिल सके और निर्णय व्यापक सहमति के आधार पर लिए जाएं।
सीईओ नियुक्ति पर नहीं हो सकी चर्चा
ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अपेक्षित एसआईटी रिपोर्ट अभी ट्रस्ट को प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद ही नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसलिए फिलहाल इस विषय पर चर्चा स्थगित रखी गई है।
सीईओ चयन की समयसीमा बढ़ाई गई
कृष्ण मोहन ने यह भी जानकारी दी कि सीईओ पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदनों की जांच और चयन प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा करने के लिए ट्रस्ट ने चयन की अवधि एक महीने तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट का कहना है कि सभी आवेदनों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि योग्य उम्मीदवार का चयन किया जा सके।
ट्रस्ट ने धार्मिक व्यवस्थाओं को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक के बाद ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कहा कि राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसलिए धार्मिक परंपराओं को व्यवस्थित और मर्यादित ढंग से संचालित करना ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नई धार्मिक समिति का गठन और सीईओ चयन प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने का निर्णय इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।











