Naxal Surrender
Naxal Surrender : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे आत्मसमर्पण अभियान से प्रभावित होकर नक्सली लगातार मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार, 2 मार्च 2026 को रावघाट एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य रामको मंडावी ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए। रामको का सरेंडर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह इलाके की खूंखार और मोस्टवांटेड महिला नक्सली रूपी की निजी सुरक्षा गार्ड (Bodyguard) रह चुकी है।
रामको मंडावी ने कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना पहुंचकर आधिकारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रामको लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में शामिल थी और शीर्ष नेतृत्व के करीब थी। वह विशेष रूप से एरिया कमेटी मेंबर (ACM) रूपी की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही थी। रामको के सरेंडर से पुलिस को रूपी के ठिकानों और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, सुरक्षा बल रूपी की गिरफ्तारी के लिए सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्ति के लिए तय की गई प्रतीकात्मक समय सीमा (डेडलाइन) को बीते दो दिन हो चुके हैं। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कांकेर के जंगलों में अब केवल 14 सक्रिय नक्सली बचे हैं। इन बचे हुए नक्सलियों में मुख्य रूप से एसीएम रूपी और डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) चन्दर शामिल हैं। पुलिस प्रशासन लगातार इन नक्सलियों से अपील कर रहा है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें।
बीते कुछ दिनों में कांकेर और बस्तर के इलाकों में आत्मसमर्पण की लहर देखी गई है। कुल 11 नक्सलियों ने हथियार डाले हैं, जिनमें उत्तर बस्तर डिवीजन के 6 और आरकेबी डिवीजन के 5 नक्सली शामिल हैं। इन आत्मसमर्पित नक्सलियों में 2 पीपीसीएम, 7 एसीएम और 2 पार्टी सदस्य शामिल थे। खास बात यह है कि इन सभी पर कुल मिलाकर 60 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सरेंडर के दौरान नक्सली अपने साथ 1 एके-47, 3 एसएलआर और 3 रायफल सहित कुल 9 घातक हथियार लेकर पहुंचे थे।
उत्तर बस्तर इलाके में सक्रिय परतापुर एरिया कमेटी की कमान फिलहाल रूपी के हाथों में है। रूपी कोई साधारण नक्सली नहीं है; वह मोहला-मानपुर मुठभेड़ में मारे गए खूंखार नक्सली विजय रेड्डी की पत्नी है। अपने पति की मौत के बाद उसने संगठन की बागडोर संभाली और वर्तमान में परतापुर एरिया कमेटी की प्रभारी के रूप में काम कर रही है। उसके साथ कंपनी नंबर-5 का कमांडर चन्दर और उसकी टीम अभी भी जंगलों में सक्रिय है, जो पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
एसीएम रूपी पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 8 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। वह लंबे समय से माओवादी विचारधारा का प्रचार करने और हिंसक घटनाओं को अंजाम देने में अग्रणी रही है। पुलिस का मानना है कि रामको मंडावी जैसे करीबियों के सरेंडर करने से रूपी अलग-थलग पड़ गई है। हालांकि डेडलाइन खत्म होने के बावजूद उसने अब तक मुख्यधारा का रास्ता नहीं चुना है, लेकिन पुलिस को उम्मीद है कि चन्दर और रूपी जल्द ही घेरेबंदी या दबाव के चलते आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
हाल ही में कोयलीबेड़ा इलाके में भी दो हार्डकोर नक्सलियों, शंकर और हिडमा ने पुलिस के सामने हथियार डाले थे। इनमें से एक नक्सली अपने साथ एके-47 राइफल लेकर आया था, जो नक्सलियों के कमजोर होते मनोबल का प्रतीक है। ये दोनों नक्सली कई सालों से बड़ी वारदातों में शामिल रहे थे। बस्तर संभाग में जिस तरह से आधुनिक हथियारों के साथ नक्सली सरेंडर कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि बस्तर अब शांति की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
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