Grand Conde Pink Diamond : 100 साल पुराने रहस्य से उठेगा पर्दा, फ्रांस में प्रदर्शित होगा दुर्लभ गुलाबी हीरा

फ्रांस का नौ कैरेट का दुर्लभ गुलाबी हीरा लगभग 100 साल बाद फिर प्रदर्शित होने जा रहा है। 1926 में महल से चोरी हुआ यह रत्न एक खोखले सेब में छिपाया गया था। हैरानी की बात है कि इसे एक होटल कर्मचारी ने खोज निकाला। लेकिन इसकी असली उत्पत्ति आज भी रहस्य है।

Grand Conde Pink Diamond :  फ्रांस में लगभग एक सदी पहले चोरी हुआ दुर्लभ गुलाबी हीरा ‘ग्रां कोंदे’ एक बार फिर लोगों के सामने प्रदर्शित होने जा रहा है। नौ कैरेट का यह अनमोल रत्न अपने ऐतिहासिक महत्व और रहस्यमयी चोरी की वजह से लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब फ्रांस के शातो द शांतीली स्थित कोंदे संग्रहालय में दर्शकों को इसे करीब से देखने का अवसर मिलेगा। संग्रहालय में इस हीरे के इतिहास और इससे जुड़ी घटनाओं को भी प्रस्तुत किया जाएगा।

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1926 में महल से रहस्यमयी तरीके से चोरी हुआ था हीरा

नाशपाती के आकार वाला यह दुर्लभ हीरा अक्टूबर 1926 में शातो द शांतीली महल से रात के समय चोरी हो गया था। उस घटना ने फ्रांस के ऐतिहासिक और शाही खजाने की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, चोरी के कुछ ही सप्ताह बाद हीरा बरामद कर लिया गया। इसकी बरामदगी की कहानी आज भी लोगों को हैरान करती है।

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खोखले सेब में छिपाया गया था बेशकीमती रत्न

रिपोर्ट के मुताबिक, चोरों ने हीरे को एक खोखले सेब के अंदर छिपा दिया था। चोरी के बाद वे जिस होटल में ठहरे थे, वहां एक भूखी महिला कर्मचारी ने सेब खाने के लिए उसमें काटने की कोशिश की। इसी दौरान उसे सेब के भीतर छिपा हुआ हीरा मिल गया। इस असाधारण घटना की चर्चा उस समय के समाचार पत्रों में भी व्यापक रूप से हुई थी। संग्रहालय के निदेशक मैथ्यू डेलडिक के अनुसार, यह कहानी अविश्वसनीय लग सकती है, लेकिन ऐतिहासिक रिपोर्टों में इसका उल्लेख मिलता है।

फ्रांसीसी क्रांति के दौर से जुड़ा है शाही खजाना

‘ग्रां कोंदे’ उन चुनिंदा शाही आभूषणों में शामिल है, जो फ्रांसीसी क्रांति के दौरान नष्ट होने से बच गए थे। इसकी ऐतिहासिक विरासत इसे केवल एक कीमती रत्न ही नहीं, बल्कि फ्रांस के राजशाही अतीत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी बनाती है। संग्रहालय में इसे आगामी 3 जनवरी तक प्रदर्शित किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रदर्शनी में हीरे से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज और शोध के निष्कर्ष भी दिखाए जाएंगे।

लूव्र संग्रहालय में चोरी के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता

यूरोप के सांस्कृतिक संस्थानों में पिछले 12 महीनों के दौरान चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। इनमें पेरिस के लूव्र संग्रहालय से दिनदहाड़े कीमती आभूषणों की चोरी भी शामिल है। ऐसे माहौल में लगभग 100 साल पुराने इस हीरे को दोबारा प्रदर्शित करने के फैसले पर सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं। डेलडिक ने हीरे की बीमा राशि बताने से इनकार किया, लेकिन कहा कि इसकी विशिष्ट पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक शोध किया गया है।

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गुलाबी हीरों की कीमत करोड़ों डॉलर तक पहुंचती है

प्राकृतिक गुलाबी हीरे दुनिया के सबसे दुर्लभ रत्नों में गिने जाते हैं। इनकी दुर्लभता के कारण अंतरराष्ट्रीय नीलामियों में इनकी कीमत करोड़ों डॉलर तक पहुंच सकती है। नीलामी संस्था सोथबीज के अनुसार, 2017 में एक गुलाबी हीरा लगभग 7.12 करोड़ डॉलर में बिका था। हालांकि, ‘ग्रां कोंदे’ हीरे की वास्तविक बीमा राशि सार्वजनिक नहीं की गई है।

हीरे की उत्पत्ति आज भी बनी हुई है रहस्य

शातो द शांतीली प्रशासन के अनुसार, इस हीरे का पहला उल्लेख 1740 में तैयार एक संपत्ति सूची में मिलता है। यह सूची कोंदे के राजकुमार लुई हेनरी द बोरबॉन की मृत्यु के बाद बनाई गई थी। बाद में हीरा फ्रांस के राजा लुई फिलिप की पत्नी रानी मैरी-अमेलिया के संग्रह में पहुंचा और फिर उनके बेटे हेनरी, ड्यूक ऑफ ओमाल के पास आया।हेनरी ने हजारों कलाकृतियों और पांडुलिपियों के साथ यह हीरा इंस्टीट्यूट डी फ्रांस को दान कर दिया था। इसी संस्था के स्वामित्व में आज शातो द शांतीली है, जहां कोंदे संग्रहालय स्थित है। हालांकि, इस दुर्लभ गुलाबी हीरे की मूल उत्पत्ति अब भी रहस्य बनी हुई है।

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Chandan Das

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