Rainbow Water Snake:
Rainbow Water Snake: प्रकृति की गोद में बसे उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक खबर सामने आई है। यहाँ दुनिया के सबसे रहस्यमय और दुर्लभ सांपों में शुमार ‘रेनबो वॉटर स्नेक’ (इंद्रधनुषी पानी का सांप) की झलक देखी गई है। यह सांप अपनी सतरंगी आभा और अनूठी जीवनशैली के लिए जाना जाता है। भारत में इसकी उपस्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है, यही कारण है कि इस खोज के बाद जीव विज्ञानी और पर्यावरण विशेषज्ञ बेहद उत्साहित हैं।
सांपों की दुनिया में ‘रेनबो वॉटर स्नेक’ अपनी खास आदतों के लिए प्रसिद्ध है। यह सांप दिन के उजाले में बेहद शर्मीला होता है और अपना अधिकांश समय पानी के भीतर या कीचड़ वाली झाड़ियों में छिपकर बिताता है। जैसे ही सूरज ढलता है और रात का अंधेरा गहराता है, यह सतरंगी शिकारी सक्रिय हो जाता है। इसकी यही खूबी इसे आम लोगों की नजरों से दूर रखती है। दुधवा के बफर जोन में इसकी मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) आज भी अत्यंत समृद्ध और सुरक्षित है।
इस दुर्लभ सांप की खोज का श्रेय दुधवा टाइगर रिजर्व के आउटरीच अधिकारी और जीव विज्ञानी विपिन कपूर सैनी को जाता है। उन्होंने बताया कि इस प्रजाति को दो बार जीवित अवस्था में देखा गया है, जो शोध के नजरिए से एक बड़ी उपलब्धि है। पहली बार जब यह सांप नजर आया, तो इसकी लंबाई लगभग 35 सेंटीमीटर थी। खास बात यह थी कि उस समय यह सांप अपनी त्वचा बदलने यानी ‘एक्डिसिस’ की प्रक्रिया से गुजर रहा था, जिसके कारण यह थोड़ा सुस्त दिखाई दे रहा था। विशेषज्ञों ने सांप को बिना नुकसान पहुँचाए उसका डॉक्यूमेंटेशन किया और उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया।
दुधवा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक एच राजा मोहन ने इस खोज को तराई क्षेत्र की जैविक समृद्धि का प्रमाण बताया है। उनके अनुसार, रेनबो वॉटर स्नेक का दिखना यह दर्शाता है कि दुधवा के विविध आवास जलीय जीवों के लिए अनुकूल हैं। वहीं, उप निदेशक जगदीश आर ने कहा कि बफर जोन में इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों का मिलना जैव विविधता की निरंतर निगरानी और आवास संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है। यह खोज भविष्य में तराई पारिस्थितिकी तंत्र पर होने वाले शोध कार्यों के लिए नए द्वार खोलेगी।
वैज्ञानिक रूप से ‘एनहाइड्रिस एनहाइड्रिस’ कहे जाने वाले इस सांप की कुछ खूबियां इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती हैं:
इंद्रधनुषी चमक: इसका शरीर गहरे हरे और चमकीले रंग का होता है, जिस पर रोशनी पड़ते ही सतरंगी या इंद्रधनुषी चमक दिखाई देती है।
जलीय जीवन: यह अपना पूरा जीवन पानी के स्रोतों के आसपास बिताता है और तैरने में माहिर होता है।
भोजन: इसका मुख्य आहार मेंढक, छोटे जलीय जीव, मछलियां और कीचड़ में रहने वाले कीट-पतंगे हैं।
प्रजनन: विशेषज्ञ बताते हैं कि इसकी मादा प्रजाति रेत या गीली मिट्टी में एक बार में 10 से 52 अंडे तक दे सकती है और बच्चों के निकलने तक उनकी सुरक्षा करती है।
भारत में रेनबो वॉटर स्नेक का दिखना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। आमतौर पर अमेरिका के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में पाया जाने वाला यह सांप यदि उत्तर प्रदेश के जंगलों में मिल रहा है, तो यह हमारे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जिम्मेदारी को और बढ़ा देता है। दुधवा की यह खोज न केवल पर्यटन बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगी।
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