‘I Love Muhammad’ लिखने वालों पर कार्रवाई पर बवाल, रजा अकादमी ने राष्ट्रपति को पत्र भेज जताई आपत्ति

देशभर में ‘I Love Muhammad’ लिखने और प्रदर्शित करने को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ लिया है। कानपुर से शुरू हुआ यह मामला अब महाराष्ट्र, उत्तराखंड और तेलंगाना तक पहुंच चुका है, जहां पुलिस द्वारा मुस्लिम युवाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इस पर रजा अकादमी के अध्यक्ष मौलाना सईद नूरी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजकर पुलिस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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ज्ञापन में मौलाना सईद नूरी ने क्या कहा?

मौलाना सईद नूरी ने ज्ञापन में लिखा कि “I Love Muhammad” कोई भड़काऊ या आपत्तिजनक नारा नहीं है, बल्कि यह सिर्फ मुसलमानों द्वारा अपने पैगंबर के प्रति प्रेम और श्रद्धा की अभिव्यक्ति है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार बताया और कहा कि इस पर प्रतिबंध या कार्रवाई असंवैधानिक और धार्मिक भेदभाव है।

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मौलाना ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, बरेली, कौशांबी, महाराजगंज, और उत्तराखंड, महाराष्ट्र व तेलंगाना जैसे राज्यों में निर्दोष युवाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनका कोई आपराधिक उद्देश्य नहीं था। उन्होंने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई न केवल युवाओं में भय और असुरक्षा बढ़ा रही है, बल्कि समुदाय को मुख्यधारा से अलग-थलग करने की कोशिश है।

राष्ट्रपति से क्या मांग की गई?

रजा अकादमी ने राष्ट्रपति से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की हैं:

  • ‘I Love Muhammad’ लिखने, बोलने या प्रदर्शित करने वालों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।

  • मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाई जाए।

  • जिन पुलिस अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

  • सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश दिया जाए कि शांतिपूर्ण धार्मिक अभिव्यक्ति को अपराध की श्रेणी में न रखा जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 4 सितंबर 2025 को कानपुर के रावतपुर इलाके से शुरू हुआ था। बारावफात के मौके पर बिना अनुमति निकाले गए जुलूस के दौरान कुछ लोगों ने ‘I Love Muhammad’ लिखे पोस्टर सड़क किनारे लगाए थे। दूसरे समुदाय ने इसे “नई परंपरा” कहते हुए आपत्ति जताई और तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस ने अनुमति न होने की वजह से पोस्टर हटवाए। इस पर कुछ मुस्लिम युवकों ने विरोध किया और फिर FIR दर्ज कर गिरफ्तारी हुई।जल्द ही यह मुद्दा राजनीतिक रंग लेने लगा और विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन और जुलूसों के दौरान पुलिस कार्रवाई तेज हो गई। जिससे समाज में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

रजा अकादमी की चेतावनी

मौलाना नूरी ने चेताया कि अगर ऐसे मामलों में संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई तो असामाजिक तत्व इसका फायदा उठाकर सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की अपील की है।‘I Love Muhammad’ मामले ने जहां धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है, वहीं पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि राष्ट्रपति और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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