RBI Policy: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट को 5.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को यह घोषणा करते हुए बताया कि मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ ही रहेगा। यह लगातार दूसरी बार है जब RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। जीएसटी सुधारों और वैश्विक कारकों का प्रभाव यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में जीएसटी सुधार लागू किए गए हैं, जिनके तहत रोज़मर्रा की वस्तुओं पर कर में कटौती की गई है। इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आवश्यक वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने और H-1B वीज़ा शुल्क में वृद्धि जैसे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भी नीति निर्धारण पर असर डाल सकते हैं। मजबूत जीडीपी और नियंत्रण में महंगाई विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत जीडीपी वृद्धि और अपेक्षाकृत नियंत्रित महंगाई दर को देखते हुए RBI के लिए रेपो रेट को स्थिर रखना एक संतुलित कदम माना जा रहा है। फरवरी से जून 2025 के बीच RBI ने रेपो रेट में कुल 100 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। अब जबकि महंगाई पर नियंत्रण बना हुआ है और आर्थिक विकास की रफ्तार तेज़ है, RBI फिलहाल स्थिति को स्थिर बनाए रखना चाहती है। आगामी नीतियों में क्या हो सकता है बदलाव? अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताएं काबू में रहती हैं, तो RBI आगामी नीतिगत बैठकों में अतिरिक्त कटौती पर विचार कर सकती है। हालांकि, फिलहाल MPC ने ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है। आम जनता और उद्योगों के लिए क्या मायने हैं? रेपो रेट में कोई बदलाव न होने का मतलब है कि होम लोन, ऑटो लोन और अन्य ऋणों की ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती है, वहीं उद्योगों को भी स्थिर पूंजी लागत से लाभ होता है। RBI ने अपनी अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखते हुए न्यूट्रल रुख बनाए रखा है। आर्थिक स्थिरता, जीएसटी सुधार और वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए यह एक विवेकपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। आगामी नीतियों में RBI की दिशा पर नजर रखना ज़रूरी होगा। Read More : Zubeen Garg Death Case :सिंगर जुबीन गर्ग की मौत मामला में पहली गिरफ्तारी, मैनेजर और फेस्टिवल ऑर्गनाइज़र दिल्ली से गिरफ्तारमें
















