Pakistan Taliban Tensions: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद और हिंसक झड़पों ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहद नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस समय इस्लामाबाद और तालिबान शासित काबुल के बीच “कोई संबंध नहीं” हैं और हालात ऐसे हैं कि “जंग कभी भी दोबारा शुरू हो सकती है।”

डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 अक्टूबर को एक टीवी इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट कहा कि “फिलहाल सीमा पर गोलीबारी बंद है, लेकिन माहौल तनावपूर्ण है। न तो प्रत्यक्ष और न ही अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कोई संवाद चल रहा है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि हालात इतने संवेदनशील हैं कि “शत्रुता किसी भी समय फिर से शुरू हो सकती है।”

पाकिस्तान का दावा: 200 से ज्यादा आतंकी मारे
पाकिस्तानी सेना ने हालिया सीमा संघर्षों में अपने 23 जवानों के शहीद होने की पुष्टि की है, वहीं जवाबी कार्रवाई में 200 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराने का दावा भी किया है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान की कार्रवाई के जवाब में उसके हाथों 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 30 घायल हुए।
तालिबान का पलटवार: ‘पाकिस्तान को ही दिक्कत है’
तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अफगानिस्तान किसी के साथ संघर्ष नहीं चाहता। उन्होंने कहा, “हमारे पांच अन्य पड़ोसी भी हैं, और सभी हमसे संतुष्ट हैं। पाकिस्तान ही एकमात्र पड़ोसी है जिसे हमसे परेशानी है।”
बातचीत की संभावना पर पाकिस्तान का रुख सख्त
जब ख्वाजा आसिफ से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान तालिबान से बातचीत को तैयार है, तो उन्होंने कहा, “अगर काबुल धमकियों की भाषा में बात करेगा, तो पहले उन्हें उन धमकियों को अमल में लाना होगा। उसके बाद ही बातचीत संभव है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान ने केवल आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया, न कि नागरिक आबादी को।
भविष्य के संकेत: शांति या फिर टकराव?
हालांकि दोनों देशों ने अभी गोलीबारी रोकी हुई है, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान जहां लगातार अफगान सीमा से आतंकी हमलों की शिकायत कर रहा है, वहीं तालिबान इसे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का नतीजा बता रहा है।
पाकिस्तान और तालिबान के बीच संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सीमा पर हुई हिंसा और तीखी जुबानी जंग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो दोनों देशों के बीच संघर्ष दोबारा भड़क सकता है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह एक अहम चुनौती बन सकता है।
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