Pratappur News : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया है। आरएसएस अब देश का पहला ऐसा गैरराजनैतिक संगठन बन चुका है जिसने अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण कर लिए हैं।

इस स्वर्णिम अवसर व विजयादशमी पर्व को देखते हुए आरएसएस के गणवेशधारी स्वयं सेवकों ने प्रतापपुर में पथ संचलन किया। कार्यक्रम का आयोजन नगर के मिनी स्टेडियम में किया गया। जहां बड़ी संख्या में एकत्रित हुए स्वयं सेवकों ने ध्वज प्रणाम, संघ प्रार्थना, संघ गीत व पुष्पांजलि से पथ संचलन की शुरुआत की।


स्वयं सेवकों ने मिनी स्टेडियम से लेकर कदमपारा चौक होते हुए थाना चौक तक ड्रम व बिगुल की ध्वनि के साथ पथ संचलन किया। इस दौरान नगर के हर चौक चौराहे पर मौजूद माताओं, बहनों व अभाविप कार्यकर्ताओं ने स्वयं सेवकों पर पुष्प वर्षा की। इसके पश्चात स्वयं सेवक पथ संचलन करते हुए वापस मिनी स्टेडियम पहुंचे। जहां भारत माता, संघ के गुरु माधव सदाशिव गोलवलकर व संस्थापक डा केशव बलिराम हेडगेवार के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर शस्त्र पूजन किया।

कोरिया विभाग के विभाग प्रचारक व मुख्य वक्ता नागेश नाथ योगी ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में कहा कि डा केशव बलिराम हेडगेवार ने देशवासियों के दिलों में राष्ट्र हित सर्वोपरि की भावना जगाने व देश विरोधी भीतरी ताकतों के खिलाफ संपूर्ण देश को जागरूक करने 27 सितंबर 1925 को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि संघ ने कभी भी किसी जाति या धर्म विशेष का विरोध नहीं किया। संघ केवल उनका विरोध करता है जो देश की एकता और अखंडता में बाधा पहुंचाने का कुत्सित प्रयास करते हैं। संघ के विचारों में जातिगत भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। संघ सभी जाति व धर्म के लोगों का सम्मान करते हुए सदैव उनके हित में कार्य करने को प्रयासरत रहता है।
मुख्य वक्ता योगी ने कहा कि देशवासियों में देश के प्रति समर्पण की भावना जागृत करने के लिए आज देश के छह लाख गांवों व तीन हजार शहरों में पथ संचलन के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं तथा आगे चलकर यह संख्या और बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि संघ के लिए भारत माता व राष्ट्र का सम्मान सर्वोपरि है इस सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ ने अपनी स्थापना के बाद से ही कठीन से भी कठीन परिस्थितियों का सामना किया है। संघ ने अपने सौ वर्षों के सफर के बीच कई बार देश को खंडित करने की मानसिकता रखने वाली ताकतों का विरोध झेलना पड़ा। आपातकाल के दौरान संघ पर प्रतिबंध लगाया गया। इसके बावजूद संघ कभी विचलित नहीं हुआ और संपूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोए रखने के प्रयास को जारी रखा जिसका परिणाम यह रहा कि आज संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने वाला पहला संगठन बन गया। आज देश में हिंदुत्व की लहर है। देश का प्रत्येक व्यक्ति धार्मिक कार्यों में बढ़चढकर हिस्सा ले रहा है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार को अपने बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए उन्हें संघ द्वारा संचालित शाखाओं में भेजना चाहिए।
इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक छोटेलाल जायसवाल, खंड कार्यवाह गुलाब मोहन तिवारी, मंडल कार्यवाह राजाराम यादव व अन्य उपस्थित रहे। एकल गीत आनंद शुक्ला, सुभाषित अनुराग पटेल, अमृत वचन सौरभ मानिकपुरी ने प्रस्तुत किया।

जागरूकता लाने संघ चलाएगा अभियान
बता दें कि आरएसएस द्वारा 15 नवंबर से गृह संपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत स्वयं सेवक प्रत्येक घर में भारत माता की छायाप्रति भेंट करते हुए राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना जागृत करेंगे। इसके बाद दिसंबर माह में हिंदू समाज में पनपी हुई छुआछूत की भावना दूर करने अभियान चलाया जाएगा तथा जनवरी माह में सामाजिक सद्भाव स्थापित करने प्रत्येक जाति के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा समाज में एक अच्छे वातावरण का निर्माण करने वर्ष में छह बार 18 से 35 वर्ष के युवाओं के लिए मंडल से लेकर जिला स्तर तक विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। साथ ही पालीथिन के उपयोग से होने वाले दुष्परिणामों से भी अवगत कराया जाएगा।
सकारात्मक परिवर्तन को गति देने आरएसएस का पंच परिवर्तन
आरएसएस से मिली जानकारी अनुसार भारतीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन को गति देने और समाज में अनुशासन तथा देशभक्ति के भाव को बढ़ाने के उद्देश्य से सरसंघचालक डा मोहन भागवत ने समाज में पंच परिवर्तन का आह्वान किया है। इस पंच परिवर्तन में पांच आयाम स्व का बोध अर्थात स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण, सामाजिक समरसता और कुटुम्ब प्रबोधन शामिल हैं। इसमें स्व के बोध से नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होंगे। नागरिक कर्तव्य बोध अर्थात कानून के पालन से राष्ट्र समृद्ध व उन्नत होगा। सामाजिक समरसता व सद्भाव से ऊंच-नीच जाति भेद समाप्त होंगे। पर्यावरण से सृष्टि का संरक्षण होगा तथा कुटुम्ब प्रबोधन से परिवार समृद्ध होंगे और बच्चों में संस्कार बढ़ेंगे। पंच परिवर्तन को समाज में लागू करने के लिए सभी भारतीय नागरिकों को मिलकर प्रयास करने होंगे।











