Rupee vs Dollar
Rupee vs Dollar: पिछले कुछ समय से भारतीय रुपये में जारी गिरावट और अस्थिरता के बाद आज गुरुवार को राहत भरी खबर सामने आई है। नए साल की शुरुआत से ही रुपया भारी दबाव में था और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से 91 के स्तर को पार कर गया था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने वैश्विक बाजारों में जो सकारात्मक ऊर्जा भरी है, उसका सीधा लाभ भारतीय मुद्रा को मिला है। शुरुआती कारोबार में रुपया 15 पैसे की मजबूती के साथ 91.50 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला, जो निवेशकों के लिए बड़ी राहत की बात है।
रुपये में आई इस तेजी के पीछे वैश्विक कूटनीति का बड़ा हाथ है। स्विट्जरलैंड के दावोस में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे ग्रीनलैंड मुद्दे को लेकर यूरोपीय देशों पर कोई नया टैक्स (टैरिफ) लगाने का इरादा नहीं रखते हैं। इसके अलावा, उन्होंने भारत के साथ जल्द ही एक ‘बड़ी डील’ होने के संकेत दिए हैं। इन दो बड़े बयानों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्याप्त उस डर को कम कर दिया है जो व्यापार युद्ध (Trade War) की आशंका के चलते बना हुआ था। तनाव कम होने के इन संकेतों ने भारतीय मुद्रा को ऐतिहासिक गिरावट से उबारने में मदद की है।
बता दें कि एक दिन पहले ही रुपये ने अपना सबसे खराब दौर देखा था। बुधवार को रुपया 68 पैसे टूटकर 91.65 के पार चला गया था, जो अब तक का सबसे निचला स्तर (All-time Low) था। उस समय डॉलर की भारी मांग और टैरिफ की आशंकाओं ने रुपये की कमर तोड़ दी थी। लेकिन गुरुवार सुबह से ही स्थिति बदलती नजर आई। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, ट्रंप द्वारा आठ यूरोपीय देशों पर शुल्क रद्द करने की घोषणा ने निवेशकों का भरोसा बहाल किया है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपये की मांग में सुधार हुआ है।
मुद्रा बाजार के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजार ने भी ट्रंप के बयानों का जोरदार स्वागत किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 533.37 अंक की छलांग लगाकर 82,443 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 157.20 अंक की बढ़त के साथ 25,314.70 पर कारोबार करता देखा गया। बाजार की इस हरियाली ने रुपये को अतिरिक्त सहारा प्रदान किया है। हालांकि, इस दौरान डॉलर इंडेक्स भी मामूली रूप से बढ़कर 98.78 पर रहा, लेकिन रुपये की मजबूती के आगे इसका असर सीमित दिखा।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई है, जो फिलहाल 65.35 डॉलर प्रति बैरल पर बनी हुई है। दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है। पिछले सत्र में उन्होंने शुद्ध रूप से 1,787.66 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ‘बड़ी डील’ धरातल पर आती है, तो विदेशी निवेशकों का रुझान फिर से भारत की ओर बढ़ेगा, जिससे रुपया और अधिक मजबूत हो सकता है।
मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि भारतीय मुद्रा की सेहत अब केवल घरेलू कारकों पर नहीं, बल्कि अमेरिकी नीतियों और वैश्विक शांति पर निर्भर है। ट्रंप के ‘कॉमन सेंस’ वाले फैसलों ने फिलहाल रुपये को 91 के खतरनाक स्तर से वापस खींच लिया है। आने वाले हफ्तों में भारत-यूएस डील की बारीकियां यह तय करेंगी कि रुपया अपनी पुरानी मजबूती वापस पाता है या नहीं।
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