Russia Treasure Discovery: रूस में हुई एक पुरातात्विक खोज ने इतिहास और पुरानी अर्थव्यवस्था को समझने वाले विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। मॉस्को से करीब 114 किलोमीटर दूर स्थित कोलोम्ना शहर में खुदाई के दौरान जमीन के भीतर से मिट्टी का एक मटका मिला। इसके अंदर चांदी के लगभग 2600 सिक्के सुरक्षित रखे हुए थे। पुरातत्वविदों का मानना है कि किसी व्यक्ति ने सदियों पहले अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से इसे जमीन में छिपाया होगा।
14वीं-15वीं सदी का बताया जा रहा सिक्कों का खजाना
रूस की एकेडमी ऑफ साइंसेज के आर्कियोलॉजी इंस्टीट्यूट के अनुसार, यह सिक्कों का भंडार 14वीं से 15वीं सदी के बीच का है। खोज को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें 350 से अधिक ऐसे सिक्के शामिल हैं, जिनका डिजाइन पहले उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं मिला है। विशेषज्ञ अब इन दुर्लभ सिक्कों की धातु, निर्माण तकनीक और बनावट का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि उस दौर की आर्थिक गतिविधियों के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल की जा सके।
कभी क्षेत्र के सबसे समृद्ध शहरों में शामिल था कोलोम्ना
जिस जगह से यह खजाना मिला है, वह उस समय कोई सामान्य बस्ती नहीं थी। कोलोम्ना आसपास के क्षेत्र के महत्वपूर्ण और समृद्ध शहरों में गिना जाता था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इतनी बड़ी मात्रा में चांदी के सिक्के किसी सामान्य व्यक्ति के पास होना मुश्किल था। संभव है कि यह संपत्ति किसी धनी व्यापारी या महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी की रही हो, जिसने किसी संकट की आशंका में अपनी दौलत को छिपाने का फैसला किया।
‘देंगा’ मुद्रा के सिक्कों की मिली बड़ी संख्या
खजाने में बड़ी संख्या में ‘देंगा’ नाम की पुरानी मुद्रा के सिक्के मिले हैं। मॉस्को की राजशाही ने 14वीं सदी के अंत में इस प्रकार के सिक्कों की ढलाई शुरू की थी। उस समय दो देंगा को एक कोपेक के बराबर माना जाता था, जबकि 100 कोपेक मिलकर एक रूबल बनाते थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, बरामद सिक्कों का बड़ा हिस्सा कोलोम्ना में ही ढाला गया था। इससे उस समय शहर के आर्थिक और व्यापारिक महत्व का भी संकेत मिलता है।
वासिली प्रथम और वासिली द्वितीय के शासनकाल से संबंध
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस खजाने के सिक्के मुख्य रूप से ग्रैंड प्रिंस वासिली प्रथम और वासिली द्वितीय के शासनकाल से जुड़े हैं। वासिली प्रथम ने 1389 से 1425 तक शासन किया, जबकि वासिली द्वितीय का शासन 1425 से 1462 तक रहा। उस समय मॉस्को और उसके आसपास के इलाके अलग-अलग राजनीतिक शक्तियों और रियासतों के प्रभाव में संचालित होते थे। खजाने में मिला एक विशेष सिक्का शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है, जिस पर उड़ते हुए पक्षी की आकृति बनी है।
350 से ज्यादा दुर्लभ सिक्कों ने बढ़ाई उत्सुकता
इस खोज की सबसे बड़ी खासियत केवल सिक्कों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी विविधता और दुर्लभता है। 350 से अधिक सिक्कों के डिजाइन अब तक उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड में नहीं मिले हैं। विशेषज्ञ इन सिक्कों का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इनके विश्लेषण से लगभग छह शताब्दी पहले रूस में मुद्रा निर्माण, स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को समझने में नई जानकारी मिल सकती है।
महामारी के दौर में छिपाया गया होगा खजाना
खजाने में मिले सबसे नए सिक्के 1420 के दशक के अंतिम वर्षों के बताए जा रहे हैं। इतिहासकारों के अनुसार, 1424 से 1427 के बीच रूसी रियासतों में गंभीर प्लेग महामारी फैली थी। इसी ऐतिहासिक परिस्थिति ने खजाने को छिपाने की संभावित वजह की ओर संकेत किया है। आशंका है कि मालिक ने महामारी या किसी अन्य खतरे से बचने के लिए अपनी संपत्ति जमीन में दबा दी होगी।
महामारी में मालिक की मौत से दबा रह गया राज
संभावना जताई जा रही है कि खजाना छिपाने वाला व्यक्ति बाद में उसी महामारी की चपेट में आ गया और उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद वह अपने छिपाए धन को वापस हासिल नहीं कर सका। इस तरह मटका और उसके भीतर मौजूद हजारों चांदी के सिक्के करीब 600 वर्षों तक जमीन के नीचे दबे रहे। आज यह खोज उस दौर के जीवन, व्यापार और आर्थिक परिस्थितियों का अनोखा प्रमाण बनकर सामने आई है।
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