Russia-Ukraine War
Russia-Ukraine War: यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा भीषण संघर्ष अब केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। युद्ध की विभीषिका अब धरती से सैकड़ों मील ऊपर अंतरिक्ष की गहराइयों में पहुंच चुकी है। हालिया खुफिया रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों के दावों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि रूस के जासूसी स्पेसक्राफ्ट अब यूरोपीय देशों के अति-महत्वपूर्ण सैटेलाइट्स की न केवल निगरानी कर रहे हैं, बल्कि उन्हें इंटरसेप्ट (बीच में रोकना) भी कर रहे हैं। इस कदम ने वैश्विक स्तर पर डेटा लीक होने के डर के साथ-साथ सैटेलाइट्स के आपस में टकराने का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने विशेष रूप से रूस के दो कुख्यात स्पेसक्राफ्ट ‘Luch-1’ और ‘Luch-2’ की पहचान की है, जो इस जासूसी अभियान के मोहरे बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये रूसी सैटेलाइट यूरोप के उन 12 महत्वपूर्ण उपग्रहों के संचार तंत्र में सेंध लगाने में सफल रहे हैं, जो यूरोप, ब्रिटेन, अफ्रीका और मध्य पूर्व में कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। सबसे डरावना तथ्य यह है कि ‘लुच-2’ कम से कम 17 अलग-अलग विदेशी सैटेलाइट्स के इतने करीब पहुंच गया है कि उनके बीच टक्कर की संभावना बढ़ गई है। यह रूस की अंतरिक्ष में बढ़ती आक्रामकता का स्पष्ट प्रमाण है।
सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि रूस इन सैटेलाइट्स की ‘ट्रैजेक्टरी’ (मार्ग) में बदलाव कर उन्हें जानबूझकर नष्ट करने या क्रैश कराने की क्षमता रखता है। इस समस्या की गंभीरता का कारण पुरानी तकनीक है। कई यूरोपीय सैटेलाइट्स पुराने सिस्टम पर आधारित हैं, जिनमें आधुनिक ‘एन्क्रिप्शन’ तकनीक का अभाव है। बिना सुरक्षित एन्क्रिप्शन के, इन सैटेलाइट्स के कमांड सिस्टम को हैक करना रूसी हैकर्स के लिए काफी आसान हो सकता है। यदि रूस इन पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है, तो वह पूरी वैश्विक संचार व्यवस्था को पंगु बना सकता है।
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस खतरे की पुष्टि करते हुए इसे रूस की ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ रणनीति का हिस्सा बताया है। उन्होंने खुलासा किया कि रूसी सैटेलाइट्स लगातार जर्मन सेना के उपग्रहों का साये की तरह पीछा कर रहे हैं। यह रणनीति केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है; रूस जमीन पर ड्रोन हमले, समुद्र के भीतर बिछी डेटा केबलों को काटने और अब अंतरिक्ष में जासूसी करने जैसे बहुआयामी हमले कर रहा है। इसका उद्देश्य पश्चिमी देशों के रक्षा ढांचे को भीतर से कमजोर करना है।
यूक्रेन की सैन्य ताकत का एक बड़ा हिस्सा एलन मस्क का ‘स्टारलिंक’ नेटवर्क है, जो फ्रंटलाइन पर ड्रोन संचालन और संचार में मदद करता है। रूस इस नेटवर्क को बाधित करने में विफल रहा है, जिससे क्रेमलिन में भारी आक्रोश है। रूसी सरकारी टीवी के एंकर व्लादिमीर सोलोव्योव ने तो यहाँ तक सुझाव दे दिया है कि रूस को अंतरिक्ष में परमाणु विस्फोट कर स्टारलिंक सैटेलाइट्स को नष्ट कर देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी माना कि तकनीक नष्ट होने पर रूस को संदेश भेजने के लिए फिर से ‘कबूतरों’ का सहारा लेना पड़ सकता है। नाटो देश अब रूस के ‘एंटी-सैटेलाइट’ हथियारों के विकास को लेकर हाई अलर्ट पर हैं।
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