Russia Ukraine war : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगले 15 दिनों के भीतर हालात साफ हो जाएंगे कि रूस और यूक्रेन में युद्धविराम होगा, शांति स्थापित होगी या तबाही का सिलसिला जारी रहेगा। टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसी दौरान पता चल जाएगा कि शांति शिखर वार्ता संभव है या नहीं। रूस की ओर से बयान आया है कि फिलहाल यूक्रेन के साथ शांति वार्ता की संभावना नहीं है। रूस का कहना है कि यूक्रेन लंबे समय तक शांति में रुचि नहीं रखता और वह लगातार सुरक्षा गारंटी की मांग कर रहा है। वहीं, राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि रूस जानबूझकर वार्ता से बच रहा है और युद्ध समाप्त नहीं करना चाहता।

पुतिन ने रखीं तीन बड़ी शर्तें
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने युद्ध खत्म करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें एक बार फिर दोहराई हैं। पहली, यूक्रेन को पूर्वी डोनबास का क्षेत्र रूस को सौंपना होगा। दूसरी, नाटो में शामिल होने का सपना छोड़ना होगा, क्योंकि रूस इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा। तीसरी, यूक्रेन को पश्चिमी देशों से सैन्य सहयोग और विदेशी सैनिकों की तैनाती से दूरी बनानी होगी। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने साफ कहा है कि वे रूस की कठोर शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युद्धविराम के बदले यूक्रेन को मजबूत सुरक्षा गारंटी चाहिए। उनका आरोप है कि रूस शांति की बजाय लंबी लड़ाई चाहता है।

अमेरिका और यूरोप का समर्थन यूक्रेन के साथ
अमेरिका ने भी दोहराया है कि युद्ध खत्म करने के लिए सुरक्षा गारंटी जरूरी है। यूरोपीय देशों ने यूक्रेन के साथ मिलकर सुरक्षा गारंटियों के अन्य विकल्पों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सुरक्षा गारंटी पर एक ड्राफ्ट तैयार किया जाए, जो युद्ध को समाप्त करने की दिशा में मददगार साबित हो सके। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध लगातार भयानक रूप लेता जा रहा है। उन्होंने कहा— “दो हफ्ते का समय तय कर दिया है। अब यह सामने आ जाएगा कि शांति वार्ता होती है या तबाही का दौर जारी रहता है।” उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक तरह के अल्टीमेटम के रूप में देखा जा रहा है।
युद्ध की स्थिति और मानवीय संकट
रूस-यूक्रेन युद्ध ने अब तक लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया है और हजारों की जानें जा चुकी हैं। लगातार बमबारी और हमलों से मानवीय संकट गहराता जा रहा है। यूक्रेन के कई शहर खंडहर में बदल चुके हैं और बुनियादी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप का बयान नई उम्मीद और नए दबाव दोनों पैदा करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस की शर्तें असल में यूक्रेन की संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर सीधा हमला हैं। डोनबास क्षेत्र छोड़ना, नाटो सदस्यता छोड़ना और पश्चिमी सहयोग से दूर रहना—ये तीनों शर्तें यूक्रेन को लगभग कमजोर स्थिति में धकेल देती हैं। यही वजह है कि जेलेंस्की ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें ट्रंप की डेडलाइन पर
अब पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय ट्रंप की दी गई 15 दिन की डेडलाइन पर नजर रखे हुए है। यदि इस दौरान शांति वार्ता का रास्ता निकलता है तो युद्ध की भयावहता कम हो सकती है। लेकिन अगर वार्ता नाकाम रहती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है और वैश्विक स्तर पर इसके प्रभाव और भी गहरे होंगे। हालांकि दोनों देशों की स्थितियां बिल्कुल विपरीत हैं, लेकिन अमेरिका और यूरोप के दबाव में शांति की राह निकलने की संभावना बनी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप की सक्रियता से यह उम्मीद जरूर जगी है कि आने वाले दिनों में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत की जमीन तैयार हो सके। फिलहाल, दुनिया की निगाहें अगले 15 दिनों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि युद्ध थमेगा या और भयानक रूप लेगा।
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