Nehru Compromised Chacha
Nehru Compromised Chacha: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला। पात्रा ने नेहरू को ‘कंप्रोमाइज्ड चाचा’ करार देते हुए उन पर देश के हितों के साथ समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि नेहरू के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में विदेशी खुफिया एजेंसियों की गहरी पैठ थी। पात्रा ने पूर्व पीएम के निजी सचिव एम.ओ. माथाई का जिक्र करते हुए कहा कि उनके अमेरिकी एजेंट होने की चर्चाएं आम थीं, साथ ही 1960 के दशक में सोवियत एजेंसी केजीबी (KGB) के एजेंटों की पहुंच पीएमओ के संवेदनशील दस्तावेजों तक सुलभ थी।
संबित पात्रा ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए नेहरू सरकार की रणनीतिक विफलताओं पर कई सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) द्वारा अक्साई चीन में चीनी गतिविधियों की चेतावनी देने के बावजूद नेहरू ने उसे संसद में ‘अफवाह’ करार दिया? पात्रा ने ग्वादर पोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि 1958 में ओमान के सुल्तान ने यह महत्वपूर्ण बंदरगाह भारत को देने की पेशकश की थी, लेकिन नेहरू ने इसे ठुकरा दिया। आज वही ग्वादर पोर्ट चीन और पाकिस्तान के लिए सामरिक रूप से भारत के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पात्रा ने भारत की भौगोलिक सीमाओं के साथ हुए कथित समझौतों की सूची पेश की। उन्होंने नेहरू से जुड़े निम्नलिखित बिंदुओं पर कांग्रेस से जवाब मांगा:
कच्छ का रण: आखिर किसके दबाव में भारत ने 300 वर्ग मील जमीन गंवाई?
बेरूबारी का बंटवारा: पश्चिम बंगाल के बेरूबारी क्षेत्र का आधा हिस्सा पाकिस्तान को क्यों सौंपा गया?
स्वर्ण सिंह-भुट्टो वार्ता: भारत पुंछ, उरी और गुरेज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को पाकिस्तान को देने के लिए क्यों तैयार हो गया था?
तिब्बत और कश्मीर: तिब्बत को चीन का हिस्सा मानना और कश्मीर में बिना सहमति जनमत संग्रह (Plebiscite) की बात करना नेहरू की सबसे बड़ी भूलें थीं।
नेहरू के इतिहास के साथ-साथ संबित पात्रा ने वर्तमान राजनीति और डिजिटल सुरक्षा पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में आयोजित हो रही ‘AI इम्पैक्ट समिट’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के लिए कांग्रेस टूलकिट का सहारा ले रही है। पात्रा के अनुसार, कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को समिट के खिलाफ नकारात्मक रील और पोस्ट बनाने के लिए 25 हजार से लेकर 1.5 लाख रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इसके कई स्क्रीनशॉट और मैसेज अब सार्वजनिक रूप से वायरल हो रहे हैं, जो कांग्रेस की “भारत विरोधी मानसिकता” को उजागर करते हैं।
संबित पात्रा ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि देश को यह समझने की जरूरत है कि क्या नेहरू के कार्यकाल में लिए गए विवादित फैसले किसी बाहरी दबाव या गुप्त लाभ के चलते लिए गए थे? उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को इन ऐतिहासिक गलतियों और वर्तमान में देश की प्रगति को बाधित करने के प्रयासों पर जनता को स्पष्टीकरण देना चाहिए। पात्रा के इन बयानों ने एक बार फिर नेहरूवादी विरासत और वर्तमान भाजपा की विचारधारा के बीच के वैचारिक संघर्ष को तेज कर दिया है।
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