Sanjay Raut Attack
Sanjay Raut Attack: शिवसेना (UBT) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और जारी मतदान के बीच केंद्र सरकार व निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 23 अप्रैल 2026 को मीडियाकर्मियों से चर्चा के दौरान राउत ने अत्यंत तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान चुनाव महज सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि भारतीय संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को बचाने की निर्णायक जंग है। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर कटाक्ष करते हुए यहाँ तक कह दिया कि आयोग के दफ्तर पर अब निष्पक्षता के बजाय भारतीय जनता पार्टी का प्रभाव (झंडा) साफ दिखाई दे रहा है। राउत का यह बयान विपक्षी एकता और संस्थागत निष्पक्षता के बीच बढ़ते तनाव को रेखांकित करता है।
पश्चिम बंगाल के चुनावी रण पर बोलते हुए संजय राउत ने भाजपा की रणनीतियों को ‘गुंडागर्दी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में मतदाताओं को डराने के लिए सुरक्षा बलों का अत्यधिक प्रयोग किया जा रहा है। राउत के अनुसार, मतदान केंद्रों पर मतदाताओं से अधिक संख्या में जवानों की मौजूदगी लोकतंत्र के लिए सुखद संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र की पूरी मशीनरी और संसाधन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने के एकल उद्देश्य में जुटे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बंगाल की संस्कृति और जनता बाहरी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है और वे पूरी मजबूती के साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का समर्थन कर रहे हैं।
संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए उन्हें अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को बंगाल में दखल देने के बजाय असम की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और वहां के आंतरिक हालात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राउत ने भविष्यवाणी की कि दक्षिण में एम.के. स्टालिन और पूर्व में ममता बनर्जी अपनी लोकप्रियता के दम पर एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेंगे। उन्होंने तंज कसा कि बंगाल के लोगों के खान-पान और रहन-सहन पर पाबंदी लगाने की कोशिशें वहां कभी सफल नहीं होंगी, क्योंकि वहां के लोग अपनी आजादी को प्राथमिकता देते हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति के लिए भी आज का दिन महत्वपूर्ण है, जहाँ बारामती और राहुरी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। बारामती में अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद उपजी सहानुभूति और राजनीतिक विरासत की जंग में सुनेत्रा पवार मैदान में हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने यहाँ से रिकॉर्ड 2.5 लाख वोटों से जीत का दावा कर हलचल मचा दी है। वहीं, राहुरी सीट पर भाजपा के अक्षय कर्डिले और महाविकास अघाड़ी के गोविंद मोकाटे के बीच कांटे की टक्कर देखी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि इन सीटों पर गठबंधन के भीतर कांग्रेस की नाराजगी ने चुनाव को और अधिक पेचीदा बना दिया है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दोपहर 1 बजे तक के आंकड़ों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर 62.18% का भारी मतदान हुआ है, जबकि तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 56.81% मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके हैं। ये ऊंचे आंकड़े सत्ता विरोधी लहर या मौजूदा सरकार के पक्ष में ठोस जनमत की ओर इशारा कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि 2026 के इन चुनावों में संजय राउत की भविष्यवाणियां धरातल पर कितनी सटीक बैठती हैं या चुनावी परिणाम देश की राजनीति को किसी नई और अप्रत्याशित दिशा में ले जाते हैं।
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