छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। आम बीन रहे दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर है। आखिर हादसा कैसे हुआ और प्रशासन ने क्या कदम उठाए? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। आम बीन रहे दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर है। आखिर हादसा कैसे हुआ और प्रशासन ने क्या कदम उठाए? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Sarguja Lightning Strike : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र स्थित ग्राम डुमकी में सोमवार शाम को कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि पूरा गांव शोक में डूब गया। तेज हवा और बारिश के दौरान आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दो बच्चों समेत कुल तीन लोगों की दर्दनाक मृत्यु हो गई। मृतकों में 36 वर्षीय रामसाय (पिता तिरकु), राजनाथ का 5 वर्षीय पुत्र सागर और ग्राम दुप्पी चौरा निवासी मोहरसाय की 9 वर्षीय पुत्री कुमारी रानी शामिल हैं। इस हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।


घटनाक्रम के अनुसार, रामसाय सोमवार शाम को गांव की प्राथमिक शाला के समीप अपने मवेशी चरा रहा था। इसी दौरान तेज हवा चलने से पास के आम के पेड़ से फल गिरने की संभावना को देखते हुए वहां मौजूद बच्चे सागर और कुमारी रानी आम बीनने लगे। तभी अचानक मौसम खराब हुआ और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए तीनों ने उसी आम के पेड़ को अपनी शरणस्थली बनाया, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह पेड़ उनके लिए काल साबित होगा। अचानक तेज गर्जना के साथ गिरी आकाशीय बिजली ने उन तीनों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वे घटनास्थल पर ही अचेत होकर गिर पड़े।

बिजली गिरने की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जमा हो गए। गांव के लोगों ने अपनी पुरानी पारंपरिक मान्यता के अनुसार, अचेत पड़े तीनों लोगों के शरीर पर गोबर का लेप लगाना शुरू कर दिया, ताकि बिजली का असर खत्म हो सके और उन्हें बचाया जा सके। ग्रामीणों ने काफी जद्दोजहद की, लेकिन दुर्भाग्यवश बिजली का प्रहार इतना तीव्र था कि तब तक उन तीनों की सांसें थम चुकी थीं। जब पुलिस को सूचना मिली, तो धौरपुर थाने से टीम तत्काल मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए धौरपुर अस्पताल भेजा।
एक ही गांव में तीन मौतों से शोक की लहर व्याप्त है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यह कोई पहली घटना नहीं है; हाल ही में बलरामपुर जिले के कन्दरी में भी बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े दो ग्रामीणों की मौत आकाशीय बिजली से हो गई थी। इन घटनाओं के बाद प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि बारिश के दौरान खुले में, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों और धातु के टावरों के पास न खड़े हों। सुरक्षित स्थानों या पक्के मकानों में शरण लेना ही जान बचाने का एकमात्र उपाय है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में जागरूकता के अभाव में लोग अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो जानलेवा साबित होती हैं।
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