Sawan Somwar 2026: सावन माह के प्रथम सोमवार के अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इसी क्रम में कबीरधाम जिले में वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए भव्य पदयात्रा का आयोजन किया गया। कवर्धा स्थित पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर से ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर तक करीब 18 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में शिवभक्त शामिल हुए।

बूढ़ा महादेव मंदिर में पूजा के बाद शुरू हुई यात्रा
सावन सोमवार की सुबह श्रद्धालुओं ने पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। इसके बाद शिवलिंग का जलाभिषेक कर भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। पूजा संपन्न होने के बाद हजारों शिवभक्तों का जत्था “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ भोरमदेव मंदिर के लिए रवाना हुआ।श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति भावना से पूरा क्षेत्र शिवमय नजर आया। महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी पूरे जोश और आस्था के साथ इस धार्मिक यात्रा में शामिल हुए।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने श्रद्धालुओं के साथ पूरी की पदयात्रा
इस धार्मिक आयोजन में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी शामिल हुए। उन्होंने स्वयं श्रद्धालुओं के साथ पैदल चलकर यात्रा पूरी की। उनके साथ कबीरधाम जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी से श्रद्धालुओं में उत्साह और बढ़ गया। उन्होंने भगवान शिव की आराधना करते हुए प्रदेश की खुशहाली और जनकल्याण की कामना की।

यात्रा मार्ग पर प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पूरे पदयात्रा मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इसके अलावा यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए।स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जगह-जगह मेडिकल टीमों की व्यवस्था भी की गई थी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत सहायता मिल सके।

सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं की सेवा में बढ़ाया हाथ
पदयात्रा के दौरान विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के स्वागत और सेवा के लिए कई स्थानों पर शिविर लगाए। इन शिविरों में भक्तों के लिए पेयजल, शरबत, फल और जलपान की व्यवस्था की गई।रास्तेभर भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही। डीजे पर बज रहे शिव भजनों और “बोल बम” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर लगातार आगे बढ़ते रहे।
भोरमदेव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक से पूरी होगी यात्रा
18 किलोमीटर लंबी यह ऐतिहासिक पदयात्रा भगवान भोरमदेव मंदिर पहुंचने के बाद विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के साथ संपन्न होगी। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति, अच्छी बारिश और जनकल्याण की प्रार्थना करेंगे।भोरमदेव मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है और यह धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बनी पदयात्रा
कवर्धा से भोरमदेव तक निकाली गई यह पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल हजारों श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।सावन के पहले सोमवार पर आयोजित यह भव्य यात्रा कबीरधाम जिले की धार्मिक आस्था, शिव भक्ति और आपसी भाईचारे की मजबूत तस्वीर पेश करती नजर आई।
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