Stock Market Crash : अक्टूबर महीने की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही। गुरुवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख सूचकांक 1 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार करते नजर आए। सेंसेक्स करीब 1,000 अंक टूटकर 71,500 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 में 338 अंकों यानी करीब 1.50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,284 के स्तर पर आ गया।
निवेशकों की संपत्ति में करीब 9 लाख करोड़ की कमी
बाजार में आई इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। दोपहर करीब 2 बजे तक निवेशकों के लगभग 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा होने की खबर सामने आई। बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच कई प्रमुख सेक्टर दबाव में दिखाई दिए। निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर बनी हुई है।
लगातार आठवें सप्ताह गिरावट का खतरा
सेंसेक्स और निफ्टी इस सप्ताह भी नुकसान में कारोबार कर रहे हैं। सेंसेक्स में करीब 2.6 फीसदी और निफ्टी में लगभग 2.3 फीसदी की साप्ताहिक गिरावट बताई जा रही है। यदि मौजूदा रुझान बरकरार रहता है तो भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह गिरावट दर्ज कर सकता है। ऐसा होने पर यह 2001 के बाद बाजार की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट वाली अवधि होगी।
FII की लगातार बिकवाली से बाजार पर बढ़ा दबाव
बाजार में कमजोरी के प्रमुख कारणों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली शामिल है। 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 10,000 करोड़ रुपये की निकासी की। इससे पहले पिछले पांच कारोबारी सत्रों में FII का कुल आउटफ्लो लगभग 3.6 अरब डॉलर बताया गया है। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ा है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेश पर असर
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जब अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक हो जाती हैं। ऐसे में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी बाहर निकलने का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
डॉलर की मजबूती से रुपये पर बढ़ा दबाव
भारतीय मुद्रा भी बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। गुरुवार यानी 1 अक्टूबर को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 95.99 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों की धारणा और आयात लागत को प्रभावित कर सकता है।
ऑटो शेयरों में तेज बिकवाली से सेंटीमेंट कमजोर
गुरुवार के कारोबार में ऑटो सेक्टर में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के दौरान ऑटो इंडेक्स करीब 4 फीसदी तक फिसल गया। बजाज ऑटो और महिंद्रा एंड महिंद्रा समेत कई प्रमुख ऑटो शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। ऑटो शेयरों में गिरावट ने बाजार के नकारात्मक रुख को और बढ़ाने का काम किया।
अमेरिका-ईरान तनाव और महंगा कच्चा तेल भी कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका-ईरान तनाव में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से वैश्विक स्तर पर आपूर्ति और महंगाई को लेकर आशंकाएं पैदा हो सकती हैं। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर रुपये और बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया
एशियाई बाजारों में भी कारोबार के दौरान कमजोरी देखी गई। वैश्विक बॉन्ड बाजार में सितंबर के दौरान दबाव और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित की है। इन सभी घरेलू और वैश्विक कारणों के बीच भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा और अक्टूबर के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
Read More : Omar Abdullah : पेंशन बिल पर उमर अब्दुल्ला की चुटकी, ‘घर जाना आसान होगा’ सुनकर विधानसभा में ठहाके