Share Market Crash
Share Market Crash: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में सुनामी जैसी स्थिति देखी गई। शुक्रवार का दिन निवेशकों के लिए भारी नुकसान भरा रहा, जहाँ कुछ ही घंटों के भीतर उनके 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो गए। बाजार बंद होने तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 1,097 अंक (1.37%) की भारी गिरावट के साथ 78,918.90 के स्तर पर आ गिरा। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 315.45 अंक (1.27%) टूटकर 24,450.45 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट का असर मार्केट कैप पर भी पड़ा, जो 453 लाख करोड़ से घटकर 452 लाख करोड़ रुपये के करीब रह गया।
शुक्रवार के सत्र में बाजार की गिरावट का सबसे बड़ा केंद्र बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर रहा। निफ्टी बैंक में 2.15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसने पूरे इंडेक्स को नीचे खींचने का काम किया। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी (2.09%) और पीएसयू बैंक (2.01%) में भी भारी बिकवाली हुई। ऑटो और कंजप्शन सेक्टर भी लाल निशान में बंद हुए। हालांकि, युद्ध की खबरों के बीच डिफेंस शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 2.77 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। आईटी और एनर्जी सेक्टर में भी मामूली बढ़त देखी गई, जिससे बाजार को थोड़ा सहारा मिला।
लार्जकैप शेयरों में मची खलबली के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में बिकवाली का दबाव तुलनात्मक रूप से कम रहा। सेंसेक्स पैक की बात करें तो BEL (बीईएल), सनफार्मा, एनटीपीसी, इन्फोसिस और एचसीएल टेक आज के टॉप गेनर्स (हीरो) साबित हुए। दूसरी ओर, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और एसबीआई जैसे दिग्गज बैंकिंग शेयरों ने निवेशकों को सबसे ज्यादा निराश किया। इनके साथ ही अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, मारुति सुजुकी और भारती एयरटेल जैसे बड़े नाम आज के टॉप लूजर्स (विलेन) की सूची में शामिल रहे।
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:
मिडिल ईस्ट संकट: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता युद्ध अब ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बन गया है, जिससे वैश्विक निवेशकों में डर का माहौल है।
एफआईआई की निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। केवल गुरुवार को ही उन्होंने 3,752.52 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
कच्चे तेल की तपिश: युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बुरा संकेत है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में शांति की कोई ठोस पहल नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती भारतीय रुपयों और इक्विटी मार्केट पर दबाव बनाए रखेगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे फिलहाल जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचें और ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाएं। अगले हफ्ते बाजार की नजरें वैश्विक कूटनीतिक हलचलों और केंद्रीय बैंकों के बयानों पर टिकी रहेंगी।
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