Hindu politics Bihar: बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। सुपौल स्थित श्री राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा ऐलान किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर गौ भक्त निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि धर्म, गौ माता और सनातन संस्कृति की रक्षा है।

गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग
शंकराचार्य ने कहा कि देश में कोई भी राजनीतिक दल अब तक गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के समर्थन में आगे नहीं आया है। उन्होंने गौ मतदाता संकल्प यात्रा की शुरुआत करते हुए यह संदेश दिया कि अब समय आ गया है जब धर्म आधारित मतदान को बढ़ावा दिया जाए।उन्होंने कहा, “गौ माता के संरक्षण के बिना सनातन धर्म की रक्षा संभव नहीं है। यह चुनाव धर्म का है, राजनीति का नहीं।”

धार्मिक नहीं राजनीतिक उद्देश्य से अलग है यह पहल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने साफ किया कि वे कोई राजनीतिक दल नहीं बना रहे और ना ही राजनीति में स्थायी प्रवेश कर रहे हैं। उनका यह प्रयास केवल एक धार्मिक कर्तव्य है, जो समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए उठाया जा रहा कदम है। उन्होंने आगे कहा, “यदि समाज में संकट है और धर्म खतरे में है, तो एक धार्मिक व्यक्ति होने के नाते मेरा दायित्व है कि मैं समाधान का मार्ग सुझाऊं। यह धर्म के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास है।”
भक्तों में उत्साह, माहौल रहा अध्यात्मिक
प्रेस वार्ता के दौरान श्री राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर पूरी तरह अध्यात्मिक माहौल में डूबा रहा। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य के विचारों को श्रद्धा और उत्साह के साथ आत्मसात किया। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भजन और मंत्रोच्चारण ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
राजनीतिक हलकों में हलचल
शंकराचार्य के इस ऐलान से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सभी सीटों पर गौ भक्त निर्दलीय प्रत्याशी खड़े करने का निर्णय कई बड़े दलों की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां धर्म आधारित मतदाताओं की संख्या अधिक है।
धर्म बनाम राजनीति की नई बहस
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह कदम राजनीति और धर्म के बीच एक नई बहस को जन्म दे सकता है। जहां एक ओर वह इसे केवल सनातन धर्म की रक्षा का प्रयास बता रहे हैं, वहीं यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनाव में उनके उम्मीदवार किस हद तक जनता का समर्थन जुटा पाते हैं।
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