Vanatara Case: वनतारा मामले में सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट, SIT रिपोर्ट रहेगी गोपनीय – कोर्ट ने अनावश्यक आपत्तियों पर लगाई लगाम

Vanatara Case: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के जामनगर स्थित प्रसिद्ध पशु बचाव एवं पुनर्वास केंद्र वनतारा (Vantara) की जांच को लेकर गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर संतोष व्यक्त किया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि SIT की रिपोर्ट गोपनीय रहेगी और फिलहाल इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

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सीलबंद रिपोर्ट पर आधारित होगा निर्णय

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि वे SIT द्वारा सौंपी गई सीलबंद रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विचार करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय सुनाएंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट में वनतारा के कामकाज में सुधार हेतु कोई सिफारिशें या सुझाव दिए गए हैं, तो वह संबंधित सरकारी अधिकारियों को इस पर कार्रवाई के निर्देश देगी।

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कानूनी मानकों का पालन ज़रूरी

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, “अब हमारे पास एक स्वतंत्र समिति की रिपोर्ट है, जिसमें विशेषज्ञों की भी मदद ली गई है। हम उसी के अनुसार कार्य करेंगे। जब तक यह साबित नहीं होता कि वनतारा पशु सुरक्षा से संबंधित सभी कानूनों का पालन कर रहा है, तब तक हम किसी को भी बार-बार आपत्तियां उठाने की अनुमति नहीं देंगे।” इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने यह संकेत दिया कि पुनरावृत्त आपत्तियों और बिना ठोस आधार के आरोपों को अब गंभीरता से नहीं लिया जाएगा।

वनतारा के वकील की अपील – रिपोर्ट न हो सार्वजनिक

वनतारा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कोर्ट से आग्रह किया कि SIT रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए, क्योंकि इससे मीडिया खासकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भ्रामक नैरेटिव फैल सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर रिपोर्ट सार्वजनिक की गई तो न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे अखबार रिपोर्ट का एक हिस्सा छापकर अलग कहानी बना सकते हैं।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताते हुए स्पष्ट किया कि SIT रिपोर्ट गोपनीय रखी जाएगी और मीडिया में लीक या चर्चा योग्य नहीं होगी।

नैरेटिव की राजनीति पर लगाम

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख उन तमाम खबरों और आरोपों पर एक बड़ा जवाब माना जा रहा है, जिनमें वनतारा के संचालन पर सवाल उठाए जा रहे थे। अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी पक्ष यदि बिना ठोस आधार के आरोप लगाता है तो उसे गंभीरता से नहीं लिया जाएगा।

कानूनी और नैतिक संतुलन की मिसाल

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय दर्शाता है कि जांच की निष्पक्षता और पशु अधिकारों की रक्षा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। SIT द्वारा पेश की गई रिपोर्ट को गोपनीय रखकर अदालत ने एक संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है, जो न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को बनाए रखने में सहायक होगा।

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