Stock Market Fall
Stock Market Fall: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है। सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में बाजार लाल निशान के साथ बंद हुआ। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1048 अंक की भारी गिरावट के साथ 80,238.85 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 313 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,865.70 पर आकर रुका। यह लगातार तीसरा सत्र है जब बाजार में बिकवाली का दौर हावी रहा। वैश्विक अनिश्चितता और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे घरेलू बाजार से भारी पूंजी निकासी हुई है।
बाजार में आई इस सुनामी के कारण बीएसई (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन महज कुछ ही दिनों में धराशायी हो गया। बुधवार, 25 फरवरी को जो मार्केट कैप 467.4 लाख करोड़ रुपये था, वह सोमवार को गिरकर 457 लाख करोड़ रुपये से भी नीचे आ गया। आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को बीएसई पर 869 स्टॉक्स ने अपने 52-हफ्ते के सबसे निचले स्तर (52-week low) को छू लिया। इस बिकवाली ने बाजार के दिग्गजों से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों तक, हर जगह तबाही मचाई है।
बाजार की इस गिरावट में कई ब्लू-चिप और नामी कंपनियों के शेयर अपने एक साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए। इनमें TCS, ITC, विप्रो, और सुजलॉन एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा IRCTC, IREDA, IRFC, NHPC और रेल विकास निगम (RVNL) जैसे सरकारी उपक्रमों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई। हाल ही में लिस्ट हुई स्विगी और डिक्सन टेक्नोलॉजीज जैसे स्टॉक्स भी इंट्राडे ट्रेड में अपने न्यूनतम स्तर पर पहुँच गए। हालांकि, इस नकारात्मक माहौल के बावजूद ONGC, SAIL और भारत फोर्ज समेत 94 स्टॉक्स ने विपरीत दिशा में चलते हुए अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर को भी छुआ।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, मिडिल ईस्ट में ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या के बाद भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भारतीय रुपये (INR) की कमजोरी ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। तेल की आपूर्ति में संभावित बाधाओं से भारत में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर देश की राजकोषीय स्थिति पर पड़ेगा। विशेष रूप से ऊर्जा और रसायन (Chemical) पर निर्भर सेक्टर्स के मुनाफे (Margins) पर भारी दबाव आने की आशंका है।
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का मानना है कि वर्तमान में बाजार का ढांचा कमजोर है, लेकिन तकनीकी रूप से यह ‘ओवरसोल्ड’ (Oversold) स्थिति में है। ऐसी स्थिति में निचले स्तरों से एक टेक्निकल बाउंस-बैक (सुधार) की संभावना बनी रहती है। उनके अनुसार, डे ट्रेडर्स के लिए 24,750 का स्तर निफ्टी के लिए एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन होगा। जब तक बाजार इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तब तक पुलबैक की उम्मीद की जा सकती है, जिससे निफ्टी 25,000-25,075 तक वापस जा सकता है। लेकिन यदि निफ्टी 24,750 के नीचे फिसला, तो यह 24,500 के स्तर तक भी गिर सकता है।
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